जागरण संवाददाता, लखनऊ। उत्तर प्रदेश वन निगम के 64.82 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला काफी कुछ डा. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के एफडी मामले से मिलता-जुलता है।
एकेटीयू के मामले में जालसाज ने स्वयं को बैंक का प्रबंधक बताकर विश्वविद्यालय प्रबंधन को विश्वास में लिया था, जबकि इस प्रकरण में आरोपितों ने खुद को वन निगम का स्टाफ बताकर भरोसे में लिया और इतना बड़ा फ्राड कर दिया। बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक और अन्य कर्मी लक्ष्य पूरा करने की लालसा में चूक कर बैठे और हेराफेरी के शिकार बन गए।
पिछले साल जून में एकेटीयू द्वारा 120 करोड़ रुपये की एफडी कराई जानी थी। तब जालसाज गिरोह से जुड़ा अनुराग श्रीवास्तव खुद को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का मैनेजर बताते हुए एकेटीयू पहुंचा। वहां अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर बिड में शामिल हुआ।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का फर्जी अथारिटी लेटर फाइनेंस कंट्रोलर को दिया। कुछ ऐसा ही घटनाक्रम बैंक ऑफ इंडिया में हुआ। यहां जालसाज दीपक संजीव सुवर्णा और अनीस उर्फ मनीष बैंक पहुंचे और स्वयं को वन निगम का कर्मी बता कर विश्वास में ले लिया।
बताया कि कि वन निगम फिक्स्ड डिपाजिट कराना चाह रहा है। इस कार्य के लिए दीपक को अधिकृत किया गया है। इसके बाद उन्होंने खाता खुलवाने के लिए वन निगम का जाली केवाइसी, पैन कार्ड, जीएसटी पंजीकरण प्रमाण पत्र लगाकर बचत खाता खुलवा लिया।
26 दिसंबर को दीपक ने बैंक पहुंचकर खाते की चेक बुक भी ले ली। इसी बीच एक जनवरी को वन निगम ने बैंक के खाते में 64.82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा करा दी। बैंक के अनुसार निगम के प्रबंध निदेशक के नाम से एक वर्ष की एफडी करने का ईमेल भी बैंक को मिला।
दो जनवरी को दीपक बैंक पहुंचा और एक फर्जी पत्र देकर 6.82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को फिक्स डिपाजिट करने और 58 करोड़ रुपये वन निगम के बचत खाते में ट्रांसफर के लिए कहा। उसने खाते के साथ जुड़े मोबाइल नंबर को भी बदलने के लिए आवेदन भी किया।
इसी पत्र में एफडी के पेपर भी दीपक को देने के निर्देश दिए गए थे। बैंक ने विश्वास करते हुए सभी प्रक्रिया पूरी कर दी। इसके बाद दीपक ने दो से पांच जनवरी के बीच छह करोड़ से अधिक रुपये कई खातों में ट्रांसफर करा लिए।
वन निगम को जब इस मामले की जानकारी हुई तो 13 जनवरी को प्रबंधक निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने गाजीपुर थाने में बैंक की सदर शाखा के कर्मचारियों पर 64.82 करोड़ रुपये गबन करने की एफआईआर दर्ज कराई। |
|