टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ इलॉन मस्क ने एक पॉडकास्ट में कहा कि उनकी पार्टनर शिवोन जिलिस दिल से आधी भारतीय हैं। उन्होंने अपने बेटे का नाम नोबेल विजेता वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के नाम पर ‘शेखर’ रखा है। पूरा नाम सेल्डन शेखर लाइकुर्गस मस्क है।
मस्क ने कहा कि अमेरिका को भारतीय टैलेंट से बहुत फायदा हुआ है। वहीं उन्होंने कहा कि 10-20 साल में AI और रोबोटिक्स इतने डेवलप हो जाएंगे कि इंसानों के लिए काम करना जरूरी नहीं रह जाएगा। काम उनके लिए हॉबी की तरह होगा।
मस्क ने ये बात ब्रोकिंग फर्म जिरोधा के फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट 'पीपल बाय WTF' में कही। ये पॉडकास्ट 1 घंटे 54 मिनट का था जो रविवार को रिलीज हुआ।
पढ़ें इंटरव्यू के महत्वपूर्ण हिस्से...
सवाल 1: AI और रोबोटिक्स की वजह से काम का भविष्य क्या होगा?
जवाब: मेरा अनुमान है कि आने वाले 10-20 साल में काम एक विकल्प बन जाएगा। लोग चाहें तो काम करें, चाहें तो ना करें। AI इतना काम कर देगा कि ज्यादातर जरूरतें रोबोट्स और मशीन खुद पूरी कर देंगी। जॉब इंसानों के लिए जरूरत की जगह हॉबी जैसा बन जाएगा।
कुछ लोग काम इसलिए करेंगे, क्योंकि उन्हें मजा आता है, न कि अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए। AI और रोबोट्स सुनामी की तरह आगे बढ़ रहे हैं। कुछ ही सालों में दुनिया में जरूरत से ज्यादा सामान बनेंगे, यानी कीमतें कम होंगी।
सवाल 2: सबको सब कुछ मिलेगा तो लोग किस बात पर कम्पीट करेंगे?
जवाब: हम सिंगुलैरिटी की तरफ जा रहे हैं। यानी, AI इंसानों से कहीं ज्यादा होशियार हो जाएगा। उसके बाद क्या होगा, कोई नहीं जानता। पहले 20-30 साल तक AI हमें खुश रखने में लगेगा। अच्छा खाना, अच्छी फिल्में सब कुछ सस्ता और बेस्ट क्वालिटी में देगा।
उसके बाद AI अपने लिए काम करने लगेगा। जब सारे इंसान खुश और सेट हो जाएंगे, तब AI अंतरिक्ष में नई दुनिया बसाएगा, नई खोज करेगा। वो सब जो हम सोच भी नहीं सकते।
सवाल 3: आप अमेरिका में भारतीय टैलेंट को लेकर क्या सोचते हैं?
जवाब: दुनिया के लिए भारत काफी महत्वपूर्ण है। यहां टैलेंट बहुत है। अमेरिका को भारतीयों से काफी फायदा हुआ है। टेस्ला और स्पेसएक्स में सबसे स्मार्ट लोग भारतीय हैं। H-1B प्रोग्राम का दुरुपयोग हुआ था, लेकिन इसे खत्म करने की बात गलत है।
बिना बॉर्डर कंट्रोल के कोई देश नहीं चल सकता, लेकिन टैलेंटेड इमीग्रेंट्स को वेलकम करना चाहिए। बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन में फ्री-फॉर-ऑल था, जिससे नेगेटिव इफेक्ट पड़ा।
अमेरिका को टॉप टैलेंट चाहिए और भारत इसमें लीडर है। मेरी कंपनियों में हम दुनियाभर से बेस्ट लोगों को लाते हैं। इमिग्रेशन पॉलिसी को बैलेंस्ड रखना होगा अवैध इमिग्रेशन रुकना चाहिए, लेकिन स्किल्ड वीजा को प्रमोट करना चाहिए।
सवाल 4: ट्विटर को X क्यों बनाया? क्या यह सही फैसला था?
जवाब: ट्विटर एक तरह की आइडियोलॉजिकल इंबैलेंस में चला गया था। वो वामपंथी विचारों को बढ़ावा दे रहा था, जबकि दक्षिणपंथी आवाजें दबाई जा रही थीं। मैंने इसे सबके लिए बराबर बनाने की कोशिश की। X का विजन ग्लोबल टाउन स्क्वायर है यानी वर्ड्स, वीडियो, कॉलिंग, मैसेजिंग और पेमेंट एक ही जगह पर। यानी X का फ्यूचर एक एवरीथिंग एप की तरह है।
सवाल 5: ज्यादा बच्चे होने चाहिए या नहीं? फर्टिलिटी रेट क्रैश क्यों खतरनाक है?
जवाब: जरूर होने चाहिए। दुनिया में आज ज्यादातर देशों में औसतन एक महिला से सिर्फ 1.5-1.6 बच्चे ही हो रहे हैं, जबकि समाज चलते रहने के लिए कम-से-कम 2.1 बच्चे चाहिए।
अगर यही चलता रहा तो 100-150 साल बाद इंसान की आबादी इतनी कम हो जाएगी कि पूरी मानव जाति ही खत्म हो जाएगी। कॉन्शियसनेस बढ़ानी है तो ज्यादा लोग चाहिए। बच्चे आपको अनकंडीशनल लव करते हैं।
सवाल 6: आपके कई पार्टनर्स से बच्चे हैं? आप पारंपरिक परिवार मॉडल में विश्वास करते हैं?
जवाब: हां, मेरा मानना है कि ट्रेडिशनल फैमिली मॉडल काम करता है और ज्यादातर लोगों के लिए सही भी है। मेरी स्थिति थोड़ी अलग है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ट्रेडिशनल फैमिली मॉडल गलत है।
सवाल 7: आपकी बॉडी देखकर हैरानी हुई, आप काफी मस्कुलर हैं, उतना सोचा नहीं था।
जवाब: (हंसते हुए) ओह स्टॉप, आप मुझे ब्लश करवा रहे हो! बस वर्कआउट करता हूं, लेकिन रियल चीट कोड है- कभी क्विट न करना। मैं अभी भी 100 घंटे से ज्यादा काम करता हूं।
सवाल 8: अमेरिका पर बहुत ही ज्यादा कर्ज है, इसे सॉल्व करने का रास्ता क्या है?
जवाब: करेंसी डिफ्लेशन से नहीं चलेगा। एक ही रास्ता है- एआई और रोबोटिक्स। ये प्रोडक्टिविटी को इतना बढ़ा देगा कि कर्ज मैनेज हो जाएगा।
लेकिन ये बस बदलाव जैसा होगा, लंबा नहीं चलेगा। परमानेंट ग्रोथ के लिए यूनिवर्सल हाई इनकम की तरफ जाना पड़ेगा, जहां एआई वैल्यू क्रिएट करे।
सवाल 9: फ्यूचर में पैसा रहेगा भी या गायब हो जाएगा?
जवाब: लॉन्ग टर्म में पैसा गायब हो जाएगा। जब AI-रोबोट्स हर जरूरत पूरी कर देंगे तो लेबर एलोकेशन के लिए पैसा नहीं चाहिए। एनर्जी ही असली करेंसी बनेगी।
सवाल 10: इंडिया के एंटरप्रेन्योर्स को क्या एडवाइस देंगे?
जवाब: यूजफुल प्रोडक्ट या सर्विस बनाओ जो लोगों की जिंदगी आसान करे, पैसा अपने आप पीछे-पीछे दौड़ेगा। दिन-रात मेहनत करो, असफलता को गले लगाओ, बार-बार गिरो, लेकिन हर बार कुछ नया सीखकर उठो। बस ये याद रखो – आप समाज से जितना लेंगे, उससे ज्यादा वापस लौटाओ। नेट पॉजिटिव कंट्रीब्यूटर बनो, बाकी सब अपने आप सेट हो जाएगा।
सवाल 11: लाइफ का मतलब क्या है? आपने क्या निष्कर्ष निकाला?
जवाब: “मैंने इस सवाल पर बहुत सोचा। बचपन में 12-13 साल की उम्र में डगलस एडम्स की किताब द हिचहाइककर्स गाइड टू द गैलेक्स पढ़ी। किताब में पृथ्वी एक सुपर-कंप्यूटर निकलती है जिसका काम था ‘लाइफ, यूनिवर्स और एवरीथिंग’ का जवाब ढूंढना।
7.5 मिलियन साल चलने के बाद कंप्यूटर का जवाब आता है - 42। लेकिन फिर सब समझ आता है कि असली जवाब नहीं, असली सवाल ढूंढना सबसे मुश्किल है। 42 का मतलब क्या है, ये कोई नहीं जानता क्योंकि सवाल ही गलत था।
सही सवाल ढूंढने के लिए पृथ्वी से भी बड़े कंप्यूटर की जरूरत है। तो मेरा निष्कर्ष ये है- लाइफ का मतलब है कॉन्शियसनेस का दायरा और स्केल बढ़ाना। हम अभी ये भी नहीं जानते कि हमें क्या नहीं पता। जो सवाल हमें पता भी नहीं कि पूछने हैं, वही सबसे जरूरी हैं।
सवाल 12: लॉन्ग टर्म में स्टॉक में पैसा लगाने का एकमात्र फॉर्मूला क्या है?
जवाब: प्रोडक्ट्स-सर्विसेज अभी पसंद हैं? प्रोडक्ट रोडमैप शानदार है? टीम टैलेंटेड + हार्डवर्किंग है और मॉटिवेटेड है? बस इतना देखो। डेली फ्लक्चुएशंस को पूरी तरह इग्नोर करें।
सवाल 13: अभी आपको सबसे एक्साइटेड क्या कर रहा है- टेस्ला, स्पेसएक्स, xAI?
जवाब: तीनो कंपनियां एक साथ मिल रही हैं। टेस्ला + स्पेसएक्स + xAI… भविष्य सोलर-पावर वाले AI सैटेलाइट्स का है। धूप तो अंतरिक्ष में 24 घंटे मिलती है।
इसलिए वहां ऊपर सोलर एनर्जी इकट्ठा करके AI को कभी बैटरी खत्म होने की टेंशन नहीं रहेगी। इसके लिए तीनों का कॉम्बिनेशन चाहिए।
टेस्ला दुनिया का नंबर-1 रियल वर्ल्ड AI बना रहा है
→ सेल्फ-ड्राइविंग कारें अब ऑस्टिन में कोई भी ऐप से बुला के ट्राई कर सकता है
→ अगले साल गर्मियों से ऑप्टिमस रोबोट की फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर बनना शुरू होगा
→ हर आदमी को अपना निजी C-3PO/R2-D2 जैसा रोबोट हेल्पर मिलने वाला है
स्पेस एक्स का स्टारलिंक कमाल कर रहा है

→ आज 150 देशों में चल रहा है, भारत में भी जल्द आएगा
→ धरती पर कहीं भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा देगा
तीनों मिलकर ऊपर अंतरिक्ष में सोलर पावर + AI + इंटरनेट का जाल बिछाएंगे। फिर नीचे हर इंसान के पास अपना रोबोट और हमेशा ऑन इंटरनेट रहेगा।
जवाब: काफी ज्यादा प्रोबैबलिटी है 50 साल पहले गेम में काफी छोटे थे, आज गेम असली दुनिया जैसे दिखते हैं। अगर यही स्पीड चली तो जल्दी ही गेम और हकीकत में फर्क ही नहीं रहेगा। बेस रियलिटी में होने की प्रोबेबिलिटी बहुत कम है।
सवाल 15: धर्म के बिना नैतिकता संभव है या नहीं?
जवाब: बिल्कुल पॉसिबल है। नैतिकता का धर्म से कोई जरूरी रिश्ता नहीं है। प्यार से रहो, दूसरे का दुख समझो, चोरी-मार-काट मत करो। ये बातें किसी भी धर्म में मिल जाएंगी, लेकिन ये धर्म से पहले भी थीं। ये तो बस कॉमन सेंस है।
अगर सब एक-दूसरे को मारने लगें या धोखा देने लगें तो समाज दो दिन भी नहीं टिकेगा। इसलिए अच्छे नियम हर कहीं खुद-ब-खुद बन जाते हैं। चाहे भगवान को मानो या न मानो।
सवाल 16: आज के जमाने में कॉलेज जाना जरूरी है या नहीं?
जवाब: सोशल रीजंस के लिए ठीक है। लेकिन फ्यूचर में स्किल्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। पोस्ट-वर्क सोसाइटी आएगी। AI-रोबोटिक्स सुपरसॉनिक सुनामी है। मेरे बड़े बेटे भी कॉलेज जा रहे हैं हालांकि जानते हैं कि उनकी स्किल्स फ्यूचर में अनयूजफुल हो जाएंगी।
सवाल 17: अगर अपनी कंपनी के अलावा एक स्टॉक खरीदना हो तो कौन सा?
जवाब: AI-रोबोटिक्स वाली कंपनियां। गूगल और एनवीडिया अभी सबसे सॉलिड लग रहे हैं। फ्यूचर में लगभग सारी वैल्यू AI, रोबोटिक्स और स्पेस से आएगी।
सवाल 18: ट्रंप के टैरिफ प्लान से आप डिसअग्री करते हैं?
जवाब: हां। फ्री ट्रेड बेस्ट है। टैरिफ्स मार्केट में डिस्टॉर्शन लाते हैं। स्टेट के अंदर टैरिफ लगाएंगे तो इकोनॉमी तबाह हो जाएगी। मैंने ट्रम्प को समझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं माने।
सवाल 19: DOGE से सबसे बड़ा सबक क्या मिला?
जवाब: DOGE यानी, डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी ने सिखाया कि सबसे साधारण बदलाव भी अरबों डॉलर बचा सकते हैं। पहले सरकारी पेमेंट सिस्टम में फ्रॉड का बोलबाला था। जैसे फर्जी NGO बनाकर “बेबी पांडा बचाओ” जैसे नाम से पैसा लूटना।
DOGE ने बस दो बेसिक चीजें जोड़ीं...
हर पेमेंट के लिए कोड नंबर जरूरी और कमेंट बॉक्स में डिटेल्स भरना अनिवार्य कर दिया। इससे फ्रॉड पकड़ना आसान हो गया, और हर साल 100-200 बिलियन डॉलर की बचत हो रही है। मतलब, बड़ी-बड़ी स्कीम्स की बजाय छोटी-छोटी सावधानियां ही असली गेम-चेंजर हैं।
पॉडकास्ट करने वाले निखिल कामत के बारे में भी जानिए...
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