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जागरण संवाददाता, आगरा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में सोमवार को आगरा कालेज में चहारदीवारी के निर्माण को पेड़ काटने से संबंधित याचिका पर सुनवाई हुई।
एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के लिए निर्धारित निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को दिए हैं।
टीटीजेड में बिना अनुमति के पेड़ काटने पर प्रति पेड़ एक लाख रुपये जुर्माने का नियम है। प्रतिपूरक पौधारोपण में 10 गुणा पौधे और 10 गुणा पौधे जुर्माना के रूप में लगाने होते हैं।
एक पेड़ के बदले में 20 पौधे लगाने के साथ ही पौधारोपण को चिह्नित भूमि की संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचना करनी होती है।
एनजीटी के न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की बेंच ने आगरा कालेज में पेड़ काटने की याचिका पर सुनवाई की। वादी से बेंच ने पूछा कि पेड़ कब काटे गए? वादी ने 27 सितंबर, 2025 को प्राचार्य द्वारा पेड़ कटवाने की शिकायत करने, वन विभाग द्वारा मामला दर्ज करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही।
बेंच ने कहा कि प्राचार्य अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकता है। कालेज की प्रबंध समिति से शिकायत की गई या नहीं? वादी ने कहा कि आगरा के मंडलायुक्त, कालेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं। बेंच ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा, मंडलायुक्त? वादी ने इस पर सहमति जताई।
बेंच ने पूछा कि पेड़ किस प्रजाति के थे? बेंच ने आदेश किया कि प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी निरीक्षण करें।
पेड़ों को काटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करते हुए तीन माह में अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। बेंच ने याचिका निस्तारित कर दी है। वन विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर वादी पुन: याचिका दाखिल कर सकेगा। |
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