प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बरेली। गाजियाबाद से बरेली होते हुए लखनऊ तक फोर लाइन रेल परियोजना पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। रेलवे बोर्ड के निर्देशन में इस परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है। बरेली और रामपुर के बीच जगह की कमी को देखते हुए एक नई रेल लाइन को बाइपास होकर निकालने का प्रस्ताव तय किया गया है।
गाजियाबाद से बाया बरेली लखनऊ की कुल दूरी लगभग 450 किलोमीटर है। यह रेल मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल खंडों में शामिल है, जहां मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों समेत 24 घंटे में 300 से 350 ट्रेनों का संचालन होता है। वर्तमान में केवल दो रेल लाइनों के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहता है और अक्सर गाड़ियां देरी से चलती हैं।
अंतिम चरण में पहुंचा सर्वे
रेलवे बोर्ड ने इस समस्या के समाधान के लिए पूरे मार्ग पर दो नई रेल लाइन जोड़कर इसे चार लाइन वाला ट्रैक बनाने का निर्णय लिया है। बीते डेढ़ वर्ष से एजेंसी और रेलवे की इंजीनियरिंग टीम द्वारा सर्वे किया जा रहा था, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और डीपीआर पूरी हो चुकी है।
बरेली और रामपुर रेलवे स्टेशनों के आसपास घनी आबादी होने के कारण दोनों स्टेशनों से होकर केवल एक ही नई रेल लाइन डालने की जगह उपलब्ध है, जबकि दो नई लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में उच्च स्तरीय टीम ने एक लाइन को बाइपास से निकालने का प्रस्ताव तैयार किया है।
40 किमी लंबा होगा बाइपास
प्रस्ताव के अनुसार, बरेली में भिटौरा से रामगंगा, बुखारा होते हुए टिसुआ स्टेशन के पास नई रेल लाइन को जोड़ा जाएगा। यह बाइपास रेल लाइन 40 किलोमीटर लंबी होगी। वहीं, रामपुर में स्टेशन से पहले बाइपास होकर एक नई लाइन निकाली जाएगी, जो रामपुर और नगरिया सादात के बीच मुख्य ट्रैक से जुड़ेगी।
रामपुर का यह बाइपास 20 किलोमीटर लंबा होगा। बरेली और रामपुर दोनों स्थानों पर बाइपास से गुजरने वाली रेल लाइनों की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि गाजियाबाद से लखनऊ तक चार लाइन का रेल ट्रैक बनाया जाएगा। फिलहाल अप और डाउन के लिए केवल दो लाइनें हैं।
नए बजट सत्र में स्वीकृति की उम्मीद
दो नई रेल लाइनों के निर्माण की डीपीआर तैयार हो चुकी है। बरेली और रामपुर में एक-एक ही नई लाइन बनाने की जगह उपलब्ध है, इसलिए एक लाइन को बाइपास से निकाला जाएगा। नए बजट सत्र में इस परियोजना को रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।कुल दूरी लगभग 450 किलोमीटर है।
यह रेल मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल खंडों में शामिल है, जहां मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों समेत 24 घंटे में करीब 300 से 350 ट्रेनों का संचालन होता है। वर्तमान में केवल दो रेल लाइनों के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहता है और अक्सर गाड़ियां देरी से चलती हैं। रेलवे बोर्ड ने इस समस्या के समाधान के लिए पूरे मार्ग पर दो नई रेल लाइन जोड़कर इसे चार लाइन वाला ट्रैक बनाने का निर्णय लिया है।
दो नई लाइनों का निर्माण है प्रस्तावित
बीते करीब डेढ़ वर्ष से एजेंसी और रेलवे की इंजीनियरिंग टीम द्वारा सर्वे किया जा रहा था, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और डीपीआर पूरी हो चुकी है। बरेली और रामपुर रेलवे स्टेशनों के आसपास घनी आबादी होने के कारण दोनों स्टेशनों से होकर केवल एक ही नई रेल लाइन डालने की जगह उपलब्ध है, जबकि दो नई लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है।
ऐसे में उच्च स्तरीय टीम ने एक लाइन को बाइपास से निकालने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार बरेली में भिटौरा से रामगंगा, बुखारा होते हुए टिसुआ स्टेशन के पास नई रेल लाइन को जोड़ा जाएगा। यह बाइपास रेल लाइन लगभग 40 किलोमीटर लंबी होगी। वहीं रामपुर में स्टेशन से पहले बाइपास होकर एक नई लाइन निकाली जाएगी, जो रामपुर और नगरिया सादात के बीच मुख्य ट्रैक से जुड़ेगी।
20 किमी लंबा होगा रामपुर का बाइपास
रामपुर का यह बाइपास लगभग 20 किलोमीटर लंबा होगा। बरेली और रामपुर दोनों स्थानों पर बाइपास से गुजरने वाली रेल लाइनों की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने बताया कि गाजियाबाद से लखनऊ तक चार लाइन का रेल ट्रैक बनाया जाएगा।
फिलहाल अप और डाउन के लिए केवल दो लाइनें हैं। दो नई रेल लाइनों के निर्माण की डीपीआर तैयार हो चुकी है। बरेली और रामपुर में एक-एक ही नई लाइन बनाने की जगह उपलब्ध है, इसलिए एक लाइन को बाइपास से निकाला जाएगा। नए बजट सत्र में इस परियोजना को रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
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