बिहार में शहरों से सटे कस्बों में बसेगी टाउनशिप (AI Generated Image)
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए भूमि परिवर्तन नीति में भी बदलाव की तैयारी है। इसके तहत शहरों से सटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के आसपास शहरी सुविधाओं के साथ टाउनशिप विकसित की जाएगी। मेट्रो रेल के अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य मार्गों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से शहरी ढांचा तैयार किया जाएगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है। दरअसल, शहरीकरण के राष्ट्रीय मानक पर बिहार काफी पीछे हैं। राज्य में 15.6 प्रतिशत आबादी ही शहरों में रहती है, वहीं डेढ़ फीसदी लोग शहरों से सटी अविकसित कालोनियों एवं इलाकों में जीवनयापन कर रहे हैं।
इस तरह राज्य का वास्तविक शहरीकरण लगभग 17 प्रतिशत के आसपास है, जबकि राष्ट्रीय औसत 36 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में शहरीकरण के इस अनुपात को राष्ट्रीय औसत से आगे बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि छोटे नगरों और आसपास के बड़े गांवों को इस तरह विकसित किया जाए कि लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं मिल सके। पलायन की मजबूरी खत्म हो।
इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम होगा। इस पहल की आदर्श शुरुआत सोनपुर से करने की तैयारी है। सोनपुर और उससे सटी ग्राम पंचायतों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह क्षेत्र राज्य का आर्थिक सेंटर बन सके।
नक्शा पास करने के लिए थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन:
विभाग सभी शहरी निकायों में नक्शे के सत्यापन के लिए थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन लागू करने पर भी विचार कर रहा है। इससे पारदर्शिता के साथ निर्माण कार्यों में भी तेजी लाने का लक्ष्य है। बिल्डिंग प्लान से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए एकल खिड़की बनाने की भी योजना है। नगर विकास विभाग को सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। |
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