घटना स्थल से उठाकर बहोश बंदर को लेकर जाता वन कर्मी। स्थानीय
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। कानपुर के बाद चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर मृत पाए गए। वहीं, कुछ बंदर बेहोश थे जिन्हें पशु अस्पताल ले जाया गया। बंदरों की मौत की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। कोई करंट तो कोई ठंड से मौत की वजह बता रहा है। वहीं बंदरों की मौत के बाद पुलिस व वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
शिवरामपुर मार्ग पर बंदरों की सामूहिक मौत से इलाके में खलबली मच गई। मौनी अमावस्या के दिन रविवार सुबह करीब आठ बजे शिवरामपुर मार्ग पर मनोहरगंज के पास 20 बंदर मृत अवस्था में पाए गए, जबकि दो बंदर बेहोशी की हालत में मिले। वन विभाग और पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की।
स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे और आसपास खेत में एक साथ बड़ी संख्या में बंदरों को पड़े देखा, पुलिस को सूचना दी। चौकी प्रभारी यदुवीर सिंह पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ पहुंचे और देखा अधिकांश बंदर मृत थे, जबकि दो बंदर जीवित मिले, लेकिन वे बुरी तरह कांप रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सभी बंदर पानी में भीगे हुए थे और उनकी हालत बेहद असामान्य थी। इससे पहले आशंका जताई गई कि बंदरों को तेज ठंड या किसी अन्य बाहरी कारण से नुकसान पहुंचा है।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में विद्युत करंट से मौत की संभावना जताई है। रेंजर नफीस खान ने बताया कि सभी मृत बंदरों के शवों का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सक डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में रेंज कार्यालय में कराया गया। पशु चिकित्सक डा. मनोज कुमार ने बताया कि एक बंदर के मुंह में चोट पाई गई है, जिससे करंट लगने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बंदरों की मौत होने के कारण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
वन विभाग ने विसरा को जांच के लिए बरेली स्थित प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बंदरों की सामूहिक मौत करंट, विषाक्त पदार्थ या किसी अन्य कारण से भी हो सकती है। वैसे पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पांच दिन पहले कानपुर में मिले थे बंदरों के शव
कानपुर में 300 मीटर में कई बंदरों के शव मिले। चौबेपुर के बंदीमाता मार्ग पर फत्तेपुर गांव के पास सड़क किनारे मृत अवस्था में पड़े बंदरों के शव देख ग्रामीणों में आक्रोश था। पोस्टमार्टम हुआ तो इसमें जहर की पुष्टि हुई। सोमवार शाम करीब गांव के कुछ लोग खेतों पर गए थे |