पुलिस पर ट्रक चढ़ाने के आरोपित
जागरण संवाददाता, बरेली। खनन माफियाओं का सिंडिकेट उत्तराखंड से संचालित हो रहा है। इस सिंडिकेट का हिस्सा बरेली के भी तमाम सफेदपोश और बड़े लोग हैं। डंपरों की ओवरलोडिंग के लिए एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया है ताकि, किसी भी कीमत पर टैक्स को चोरी किया जाए। इस सिंडिकेट का अहम रोल लोकेटर निभाते हैं। हर लोकेटर को एक-एक अधिकारी की रेकी करने की जिम्मेदारी दी गई।
इसके लिए इन्हें मोटी रकम भी अदा की जाती थी। लोकेटर अधिकारी आवास और दफ्तर दोनों जगहों पर अपने गुर्गों को लगाकर रखता था। जैसे ही वह निकलते तो उनकी जानकारी वाट्स-एप ग्रुप में अपडेट कर देता था। इसके बाद सभी अलर्ट हो जाते हैं। पुलिस ने घटना के बाद पांच लोकेटरों को पकड़ा तो उन्होंने कई चौंकाने वाले राजफाश किए।
पुलिस की पूछताछ में लोकेटरों ने कई राज खोले। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के बाजपुर व अन्य जगहों से यह सिंडिकेट संचालित होता है। वहां से डंपरों के निकलने के बाद यह उत्तराखंड की सीमा में रायल्टी का भुगतान करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा में ऐसे ही प्रवेश करते हैं। यहां पर आइएसटीपी का भुगतान न करने पर एक ट्रक पर सात से साढ़े सात हजार रुपये की बचत होती है।
इसी तरह से हर दिन 40-50 ट्रकों को बिना आइएसटीपी के खेल कर यहां से चोरी छिपे निकाल लिया जाता है। इसके अलावा यदि ट्रक ओवरलोड हो तो और भी मुनाफा होता है। लोकेटरों ने बताया कि, सिंडिकेट उन्हें हर रेकी का रुपया देता है, इसलिए कुछ लोकेटर अधिकारियों के घरों की रेकी करते हैं और कुछ लोकेटर सड़कों पर टहलते हैं।
लोकेटर ग्रुप में किसी भी टीम या अधिकारी के आने की सूचना देता है वैसे ही सभी अलर्ट हो जाते हैं। यदि सड़क पर ट्रक चल रहा है तो उसे किसी ऐसी जगह लेकर खड़े हो जाते हैं, जहां जल्दी किसी की निगाह न पड़े। अधिकारी के निकलते ही फिर से निकलने लगते हैं। पुलिस ने जिन 24 लोगों को जेल भेजा है उसमें पांच लोकेटर सोहेल, अजरूद्दीन, नियाजुद्दीन, नियासुद्दीन, अनूप गुप्ता और सहरूद्दीन भी शामिल हैं।
कुछ मीडिया कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध
इस पूरे प्रकरण में कुछ इलेक्ट्रानिक मीडिया के कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना हैं कि इस पूरे प्रकरण में जो भी लोग शामिल होंगे, उनमें से किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा। घटनाक्रम के बाद कुछ मीडियाकर्मी सक्रिय हो गए। बताते है कि इसमें उनका भी नाम शामिल किया जा सकता है। ऐसा नहीं हैं कि यह घटनाक्रम पहली बार हुआ है।
इससे पहले भी दो बार एआरटीओ को कार से कुचलने का प्रयास किया जा चुका है। जनवरी 2023 में तत्कालीन एआरटीओ प्रवर्तन संदीप जायसवाल और फिर जनवरी 2024 में एआरटीओ राजेश कर्दम पर भी जानलेवा हमला किया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक, जून, 2023 में एआरटीओ संदीप जायसवाल ओवरलोड वाहनों का पीछा कर रहे थे। नवदिया झादा के पास इस सिंडिकेट में शामिल लोगों ने घेर लिया। वह गाड़ी से उतरे तो उन्हें कार से कुचलने का प्रयास किया गया।
इसी तरह से जनवरी 2024 में एआरटीओ राजेश कर्दम को भी आरवीआरआइ पुल पर कार से कुचलने का प्रयास किया गया था। इस मामले में इज्जतनगर थाने में वाहन के नंबर के आधार पर प्राथमिकी लिखी गई थी। अब तीसरा प्रकरण 2026 में हो गया। पुलिस का कहना हैं कि बार-बार पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर हमला अब बर्दाश्त से बाहर है।
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