जागरण संवाददाता, गोपालगंज। माघ महीने के मौनी अमावस्या को लेकर नदी घाट पर सुरक्षा की प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी हो गई हैं। घाटों पर गोताखोर तैनात किए जाने के साथ ही गंडक नदी में घाट व आसपास के इलाकों में कड़ी चौकसी रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा पर्व को देखते हुए प्रत्येक घाट पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया है। ताकि घाट पर उमड़ने वाली भीड़ पर नजर रखी जा सके।
रविवार को मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना करने के बाद दान देंगे। जिसे देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर गंडक नदी के डुमरिया, रुपनछाप, जोकहां, बतरदेह, सरफरा, सलेमपुर, सिकटिया आदि घाटों पर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। घाटों तक जाने वाले रास्ते की साफ सफाई का काम भी पूरा हो गया है।
प्रशासनिक स्तर पर नदी घाट पर सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध करने का निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अंचल पदाधिकारियों को घाट पर चौबीस घंटे नजर रखने का निर्देश जारी किया गया है।
घाटों पर किसी भी तरह का हादसा न हो, इसके लिए आवश्यक तैयारियों को दुरुस्त करने को कहा गया है। इसके अलावा ईटवा धाम व कटेया प्रखंड के घूर्णाकुंड में भी मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
मौनी अमावस्या पर घूर्णाकुंड त्रिमुहानी में नहान मेले की तैयारियां पूरी
रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर कटेया प्रखंड स्थित खनुआ नदी में तीन नदियों के संगम कहे जाने वाले घूर्णाकुंड त्रिमुहानी में नहान मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं।
इस अवसर पर दूर-दराज के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। मान्यता है कि खनुआ नदी के घूर्णाकुंड त्रिमुहानी में स्नान करने से पापों का नाश होता है, इसलिए हर साल भारी भीड़ उमड़ती है।
घूर्णाकुंड मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं के लिए रात्रि विश्राम और ठहरने की व्यवस्था की है। मेले में जलेबी, मिठाई, मीना बाजार और विभिन्न प्रकार की दुकानों के आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। दुकानदार दो दिन पहले से ही बांस-बली और टेंट लगाकर अपने-अपने स्थान चिन्हित कर चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।
खनुआ नदी के घाटों और मेला परिसर में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और स्थानीय सुरक्षा बल हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। मौनी अमावस्या पर इस प्राचीन स्थल पर नहान और मेला का आयोजन क्षेत्र में धार्मिक आस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय विकास में भी सहायक माना जाता है।
मौनी अमावस्या पर नदी स्नान का विशेष महत्व
पंडित किशोर उपाध्याय ने बताया कि माघ के इस महीने में मौनी अमावस्या पर नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दिन नदियों में देवताओं का निवास होता है। सोमवार को मौनी अमावस्या पर गंडक नदी सहित अन्य तमाम नदियों के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही स्नान-ध्यान तथा दान-पुण्य का कार्य होगा। इस मौके पर नदी के घाटों पर मेले का दृश्य होता है। |
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