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देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में बीजेपी की बंपर जीत के बाद मेयर पद को लेकर भी सियासत तेज हो गई है। पिछले 25 सालों से लगातार बीएमसी की सत्ता में काबिज रहा ठाकरे परिवार का कंट्रोल खत्म अब खत्म हो गया है। अब मेयर किसका होगा इसको लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्योंकि 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है और एनडीए के पास 117 सीटें हैं, आंकड़े तो काफी अच्छे लग रहे हैं लेकिन इसमें भी एक ट्विस्ट है।
क्या है वह ट्विस्ट?
बीजेपी 88 वार्डों में जीत हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो शिवसेना (एकनाथ शिंदे) ने 29 वार्डों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बिना शिवसेना के बीएमसी की सत्ता में आना बीजेपी के लिए भी मुश्किल है। ऐसे में सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस गणित के जरिए एकनाथ शिंदे फायदा उठाने की फिराक में हैं। वह अपना मेयर बनाने के लिए बीजेपी पर प्रेशर डाल सकते हैं।
शिंदे गुट के प्रवक्ताओं और दूसरे नेताओं ने भी पहले ही संकेत दे दिया है कि मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से होना चाहिए क्योंकि यह बालासाहेब (बाल ठाकरे) की विरासत है। वह अविभाजित शिवसेना के बीएमसी में लंबे शासन की बात कर रहे थे।
शिंदे ने क्या कहा?
नतीजे साफ होने के बाद शिंदे बोलते हुए ज्यादा सतर्क दिखे। उन्होंने मेयर पद के सवाल पर कहा, “हमारा एजेंडा विकास है। हमने महायुति (महागठबंधन) के तौर पर चुनाव लड़ा और मुंबई के हित में जो सबसे अच्छा होगा, उस पर फैसला करने के लिए हम साथ बैठेंगे।“
इस गोलमोल जवाब के बाद कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने हैरानी जताई कि क्या इसका मतलब यह है कि कोई बीच का रास्ता निकल सकता है, जिसमें शिंदे अपनी पार्टी के किसी व्यक्ति को 2.5 साल के लिए मेयर बनाने पर जोर दें और बाकी आधे कार्यकाल के लिए बीजेपी को मौका मिले।
ठाणे फैक्टर
विश्लेषकों के मुताबिक, एक चीज जो बीजेपी को बैकफुट पर ला सकती है, वह यह है कि एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। 131 सदस्यों वाली ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में 70 से ज्यादा सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े के ऊपर है और अपना मेयर चुन सकती है। बहुमत के लिए 66 सीटें चाहिए होती हैं। वहां बीजेपी के पास सिर्फ 28 सदस्य ही हैं।
एक विश्लेषक ने कहा, “किसी भी तरह अगर शिंदे आसानी से मेयर का पद बीजेपी को दे देते हैं तो इससे उनके पार्टी वर्कर्स को गलत मैसेज जा सकता है। इसलिए, कम से कम डिप्टी मेयर के पद, स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैनशिप और जरूरी वार्ड्स को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत होना लगभग तय माना जा रहा है।“
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