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ताजी मछलियों का हब बना हजारीबाग, बरही बाजार में रोजाना 6 क्विंटल की खपत

cy520520 5 hour(s) ago views 378
  



प्रमोद विश्वकर्मा, बरही (हजारीबाग)। अगर आपको ताजी और लोकल मछली पसंद है तो जिले के बरही चौक स्थित मछली बाजार आपके लिए सबसे उपयुक्त स्थान बन चुका है। लोकल और ताजा मछलियों की बिक्री को लेकर बरही मछली बाजार ने इलाके में अपनी अलग पहचान बना ली है। तीन राष्ट्रीय राजमार्गों के संगम पर स्थित यह बाजार अब ताजी मछलियों का प्रमुख हब बन गया है।

प्रतिदिन लगने वाली मछली बाजार में स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों और दूर-दराज से आने वाले ग्राहकों की भीड़ लगती है। बरही मछली बाजार में मुख्य रूप से तिलैया जलाशय से जुड़े तिलैया डैम से जुड़ा माधोपुर, बेंदगी, कोयली, धमना, पोड़ैया, जवाहर डैम सहित कई स्थानीय जलाशयों से विभिन्न प्रजातियों की ताजा मछलियां प्रतिदिन लाई जाती हैं। बरही मछली बाजार में दर्जनों प्रजाति का मछली उपलब्ध है, जिसमें रेहू, मिर्गल, कवय, पहाड़ी, झींगा, विकेट तथा कतला मछली की सबसे अधिक बिक्री होती है।  

लोकल जलाशयों से आने के कारण इन मछलियों की ताजगी और गुणवत्ता पर ग्राहकों का भरोसा बना हुआ है, जिससे इनकी मांग हमेशा अधिक रहती है। करीब 36 मील क्षेत्र में फैले तिलैया जलाशय के अलावा बरही प्रखंड के जरहिया, केवाल, पृथ्वीराज, बहादुर और केवलिया डैम समेत लगभग 150 छोटे-बड़े जलाशयों से भी नियमित रूप से मछलियों की आपूर्ति हो रही है।

समीपवर्ती अंजनवा, महेशा और लोटवा डैम से भी बाजार में मछलियां पहुंचती हैं। स्थानीय जलाशयों के अलावा आंध्र प्रदेश से भी मछलियां मछली मंडी लाई जाती हैं। बरहाल अधिक कीमत के बावजूद ग्राहकों की पहली पसंद लोकल और ताजी मछली ही बनी हुई है।  

बताया जाता है कि वर्तमान में बरही मछली बाजार में प्रतिदिन करीब 6 क्विंटल मछलियों की खपत हो रही है। इससे क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिला है और इस कारोबार से जुड़े मछुआरे व कारोबारी आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। मत्स्य विभाग और राज्य सरकार की ओर से नाव, फ्रीजर, ठेला, आवास तथा सस्ती दर पर ऋण जैसी सुविधाएं भी बीच बीच में उपलब्ध कराई जाती रही है।  

प्रशिक्षण के बाद मछली जीरा और फीड भी नि:शुल्क दिया जाता रहा है। तिलैया जलाशय में केज सिस्टम से मत्स्य पालन किया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। बरही के कई मत्स्य पालक पुरस्कृत भी हो चुके हैं। बरसोत गांव के मत्स्य पालक देवानंद कुमार को राज्य स्तर पर सम्मान मिल चुका है।

हालांकि कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होने से कभी-कभी कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ता है, बावजूद इसके मेहनती मछुआरों के दम पर बरही मछली बाजार निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि मछली बिक्री में स्थान रखने के बावजूद बरही मछली बाजार सड़क किनारे लगता है, इसे व्यवस्थित करने की भी जरूरत है।
होटलों और रेस्तरां में भी मछली की खपत

बरही के तीनों राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जगह-जगह लाइन होटल और रेस्तरां हैं। बरही चौक के आसपास कई ठेले ऐसे हैं, जहां लोकल ताजी मछली फ्राई और व्यंजन परोसी जाती है। होटलों और रेस्तरां में ताजी मछली की मांग लगातार बढ़ रही है। कई होटल तो झींगा होटल के नाम से भी संचालित हो रहे हैं। यहां ताजी झींगा मछली की भी खूब बिक्री होती है।
क्या कहते हैं मछली विक्रेता


बरही मछली बाजार में लोकल मछलियों की मांग लगातार बढ़ रही है। रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है, जिससे हमारा परिवार आत्मनिर्भर बन सका है। जवाहर डैम से अक्सर 25 से 30 किलो तक की भी मछली बाजार में आती है। -दिनेश निषाद (मछली विक्रेता)

तिलैया डैम व आसपास के डैम-तालाबों से ताजी मछलियां सीधे बरही बाजार पहुंचती हैं। ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और हमारे दुकान में दूर-दराज से भी लोग मछली खरीदने आते हैं। -राजा निषाद (मछली विक्रेता)

सरकार की योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ मत्स्य पालकों को मिल रहा है। हमारे दुकान में लगभग ताजी मछली की बिक्री होती है। कभी हमारी आमदनी सीमित थी, किंतु ताजी मछली कारोबार के कारण अब अच्छी कमाई हो रही है। -राधा निषाद (मछली विक्रेता)

लोकल ताजी मछली की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण ग्राहक ज्यादा पसंद कर रहे हैं। होटल और रेस्टुरेंट से भी नियमित ऑर्डर मिल रहा है। बड़ी साइज की ताजी मछलियों का अधिक डिमांड है। -गोलू निषाद  
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