शंभुआ गांव में तालाब का निरीक्षण करते नोडल एजेंसी के सीईओ डा.अय्यूब के साथ मत्स्य विभाग के अधिकारी l स्वयं
जागरण संवाददाता, कानपुर। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य विभाग ने एक नई पहल की है। मछली पालन के साथ-साथ अब सीप के माध्यम से मोती उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि पारंपरिक खेती और मछली पालन के साथ अतिरिक्त आय के साधन जोड़े जाएं, ताकि किसानों की आमदनी में ठोस इजाफा हो सके। इसी क्रम में बुंदेलखंड के बाद अब कानपुर और आसपास के जनपदों में सीप पालन कर मोती उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस योजना के तहत किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार एक सीप से तीन मोती तैयार हो सकते हैं। इस तरह एक सीप से करीब 200 रुपये तक की आमदनी होगी। जिले के शंभुआ गांव में सीप की खेती का शुभारंभ हो चुका है। यहां किसान देवेंद्र वर्मा ने तालाब में मछली पालन के साथ-साथ सीप पालन कर मोती उत्पादन की फार्मिंग शुरू की है।
खास बात यह है कि एक ही तालाब में मछली और सीप दोनों का उत्पादन एक साथ किया जा रहा है, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक होने की उम्मीद है। मोती उत्पादन मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, हाफ ब्राउन, डिजाइनर और राउंड मोती। फिलहाल कानपुर में हाफ ब्राउन और डिजाइनर मोतियों का उत्पादन शुरू किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि बाजार में डिजाइनर मोतियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं। मोती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना में 50 प्रतिशत तक सरकारी सहायता का प्रविधान है। उदाहरण के तौर पर 10 लाख रुपये के प्रोजेक्ट में करीब 15 हजार सीप तालाब में डाले जाएंगे, जिस पर सरकार की ओर से पांच लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा।
मोती उत्पादन की प्रक्रिया में लगभग 18 महीने का समय लगता है। एक सीप की खरीद पर करीब 62.14 रुपये का खर्च आता है। प्रदेश में मोती उत्पादन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में मणी एग्रो को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के सीईओ डा.अय्यूब ने बताया कि कानपुर जिले से अब तक नौ किसानों के आवेदन अनुदान के लिए प्राप्त हुए हैं, जिन्हें 15 जनवरी तक अंतिम रूप दिया जाएगा।
विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है, ताकि मोती उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके।
- सुनील कुमार, मत्स्य निरीक्षक |
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