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कुछ वरिष्ठ अधिकारी-नौकरशाह घमंडी, निर्वाचित सरकार के कामकाज में डाल रहे बाधा, जम्मू-कश्मीर के मंत्री शर्मा का आरोप

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कुछ अधिकारी अभी भी 2019 के बाद बनी सोच के साथ काम कर रहे हैं और चुनी हुई सरकार की वापसी को पचा नहीं पा रहे हैं।



राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने गुरूवार को बिना किसी का नाम लिए बगैर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश प्रशासन में कुछेक वरिष्ठ अधिकारी, नौकरशाह पूरी तरह से स्वेच्छाचारी और घमंडी हैं, जो अक्सर निर्वाचित सरकार के कामकाज में बाधा डालने का काम करते हैं। वह निर्वाचित सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को कार्यान्वयन में भी रुकावट पैदा करते हैं।

उन्होंने पत्रकारों के साथ एक बातचीत में परिवहन निगम में अनुकंपा पर नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के बारे  अपनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस संदर्भ में क आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है, लेकिन   ब्यूरोक्रेटिक लालफीताशाही के कारण काफी समय से अनुकंपा क आधार पर परिवहन विभाग में कोई नियुक्ति नहीं हो पाई है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस मुद्दे पर पहले ही एक बैठक बुला चुके हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि एसओ-12 जल्द ही लागू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अभी भी 2019 के बाद बनी सोच के साथ काम कर रहे हैं और चुनी हुई सरकार की वापसी को पचा नहीं पा रहे हैं।

शर्मा ने कहा कि कुछ ब्यूरोक्रेट्स घमंड में चूर हैं और मानते हैं कि वही यहां सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था चला रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि हर चीज़ की एक सीमा होती है, कुछ भी स्थायी नहीं होता है। जम्मू कश्मीर हमेशा के लिए केंद्र शासित प्रदेश नहीं रहेगा और यहां हमेशा अफसरशाही नहीं रहेगी। सिर्फ भगवान ही हमेशा रहता है और हम सभी अपने कर्माें के लिए ईश्वर के समक्ष जवाबदेय हैं।

उन्होंने अधिकारियों को काबिल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि  SO-12 के तहत अनुकंपा के आधार परनियुक्ति के पात्र बच्चों को अपने निजि अहं का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।ऐसे मामलों में रुकावट डालना सिर्फ़  प्रशासनिक स्तर पर नियमों को उल्लंघन ही नहीं बल्कि एक नैतिक विफलता भी है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए सक्रिय हैं, क्योंकि  करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद वह राजनीतिक सत्ता  हासिल करने में नाकामी से वह हताश हैं। प्रदेश में दो सत्ताकेंद्र नहीं हो सकते। समय बदलेगा  वह दिन दूर नहीं जब ये तत्व पूरी तरह बेनकाब हो जाएंगे।

उनके पास दिखाने के लिए कोई चेहरा नहीं होगा। मुख्यमत्री उमर अब्दुल्ला के कामकाज को लेकर पूछे गए साल के जवाब में उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला एक समर्थ और कार्यकुशल मुख्यमंत्री हैं। वह पूरी तरह पंथनिरपेक्ष हैं औरसबको साथ लेकर चलने, डेमोक्रेटिक वैल्यू और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी के मामले में उनकी लीडरशिप का कोई मुकाबला नहीं है।
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