अजिताभ गौतम, मनोवैज्ञानिक एनआईटी जमशेदपुर
डिजिटल डेस्क, जमशेदपुर। बसंत की बहार अपने साथ परीक्षाओं की दस्तक भी लेकर आती है। यह समय केवल ग्रेड्स का नहीं, बल्कि आपकी साल भर की मेहनत के जश्न का है। अक्सर छात्र इस समय दबाव और घबराहट महसूस करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सही रणनीति और सकारात्मक सोच से परीक्षा के इस \“पहाड़\“ को \“पार\“ करना बेहद आसान है?
आइए जानते हैं वे 5 स्तंभ जो आपकी तैयारी को बनाएंगे शानदार
1. योजना ऐसी, जो जीत दिला दे (Smart Planning)
बिना नक्शे के सफर अधूरा होता है। सबसे पहले अपने विषयों की एक लिस्ट बनाएं।
- प्रायोरिटी सेट करें: कठिन विषयों को पहले समय दें और आसान को बाद में।
- समय का बंटवारा: एक ही दिन में 8-9 घंटे की पढ़ाई को छोटे-छोटे स्लॉट्स में बांटें।
- पिछले वर्षों के पेपर: याद रखें, पुराने प्रश्नपत्र सफलता की चाबी हैं। इनसे आपको पेपर पैटर्न और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का सटीक अंदाजा मिलता है।
2. एकाग्रता: भटकते मन को कैसे संभालें?
पढ़ते समय अक्सर दूसरे विषय की चिंता सताने लगती है। इसे रोकने के लिए:
- एक समय में एक काम: जिस टॉपिक को पढ़ रहे हैं, पूरा ध्यान उसी पर रखें।
- लिखकर याद करें: केवल पढ़ने से बेहतर है कि आप मुख्य बिंदुओं के संक्षिप्त नोट्स बनाएं। यह आपकी याददाश्त और लिखने की गति, दोनों बढ़ाता है।
- ग्रुप स्टडी का जादू: कठिन टॉपिक्स पर दोस्तों के साथ चर्चा करें। दूसरों को समझाने से कांसेप्ट दिमाग में पत्थर की लकीर बन जाता है।
3. तन स्वस्थ, तो मन मस्त (Health First)
बीमार तन कभी एकाग्र मन नहीं दे सकता। परीक्षा के दिनों में खुद को फिट रखना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है:
- सुपरफूड लें: जंक फूड को \“ना\“ कहें और पौष्टिक आहार लें। भरपूर पानी पीएं ताकि दिमाग हाइड्रेटेड और एक्टिव रहे।
- पूरी नींद: 7-8 घंटे की नींद से समझौता न करें। नींद की कमी आपकी याद रखने की क्षमता को घटा देती है।
4. तनाव को कहें \“बाय-बाय\“ (Stress Management)
परीक्षा डरने की नहीं, खुद को साबित करने की चीज है।
- तुलना बंद करें: हर छात्र की क्षमता अलग है। अपनी तुलना दूसरों से कर खुद को कमतर न आंकें।
- हैप्पी ब्रेक्स: पढ़ाई के बीच संगीत सुनें, टहलें या चित्रकारी करें। गहरी सांस लेना (DeepBreathing) और मेडिटेशन मन को शांत रखने के अचूक उपाय हैं।
5. परीक्षा हॉल के \“गोल्डन रूल्स\“
जब आप प्रश्न पत्र सामने देखें, तो घबराएं नहीं:
- 15 मिनट का सदुपयोग: पेपर को ध्यान से पढ़ें और सबसे पहले उन सवालों को हल करें जो आपको सबसे अच्छे से आते हैं।
- प्रेजेंटेशन का ध्यान: उत्तरों के बीच एक लाइन छोड़ें और मुख्य बिंदुओं को हाईलाइट करें।
- समीक्षा (Revision): अंत में 10 मिनट उत्तरों को दोबारा पढ़ने के लिए बचाकर रखें।
एनआईटी जमशेदपुर के मनोवैज्ञानिक अजिताभ गौतम बताते हैं कि \“यूस्ट्रेस\“ (Eustress) वह आवश्यक तनाव है जो हमें चौकन्ना, सजग और प्रेरित रखता है। यही वह ऊर्जा है जो हमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद करती है। लेकिन, सावधानी जरूरी है। अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए, तो यह \“डिस्ट्रेस\“ (Distress) यानी हानिकारक तनाव में बदल सकता है। जब भी तनाव बढ़ता महसूस हो, गहरी सांस लेने के व्यायाम (Deep Breathing) का सहारा लें। यह आपके तंत्रिका तंत्र को तुरंत शांत करता है और आपको फिर से एकाग्र होने में मदद करता है। किसी भी कार्य की सफलता उसकी योजना पर टिकी होती है। तैयारी पर्याप्त होनी चाहिए और उसे समय रहते पूरा कर लेना चाहिए। अंतिम समय की भागदौड़ ही \“यूस्ट्रेस\“ को \“डिस्ट्रेस\“ में बदलती है। कौशल को निखारने के लिए निरंतर अभ्यास अनिवार्य है। जब आप किसी काम का बार-बार अभ्यास करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और अनिश्चितता का डर कम हो जाता है। |
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