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गया सोना लूटकांड में रोज नए राज, आरओ प्लांट से मिले सुरागों ने तेज की एसआईटी की कार्रवाई

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आरओ प्लांट से जुड़े सुरागों ने बढ़ाई एसआईटी की कार्रवाई। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, गयाजी। गया रेल थाना क्षेत्र अंतर्गत हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में हुए सनसनीखेज सोना लूटकांड की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। इस कांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को लगातार ऐसे अहम सुराग मिल रहे हैं, जिससे यह साफ होता जा रहा है कि लूट की साजिश बेहद सुनियोजित और संगठित थी। हर दिन जांच में नए खुलासे हो रहे हैं और आरोपी एक-दूसरे से जुड़े तार सामने आ रहे हैं।

इसी कड़ी में बुधवार को एसआईटी की टीम उस स्थान तक पहुंची, जहां लूटे गए सोने के बिस्किट काटे जाने की बात सामने आई है। पटना रेल मुख्यालय के डीएसपी भास्कर रंजन के नेतृत्व में टीम गया–पटना मुख्य मार्ग पर चाकंद थाना क्षेत्र के सती स्थान के समीप स्थित एएसएम आरओ वाटर प्लांट पहुंची। यही वह जगह बताई जा रही है, जहां लूट के बाद सोने के बिस्किट को काटकर ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी।

  
जहां काटा गया था लूटा गया सोना, उस आरओ प्लांट की एसआईटी ने की गहन जांच

एसआईटी ने आरओ प्लांट परिसर में घंटों जांच की और आसपास के लोगों से पूछताछ की। हालांकि टीम ने मीडिया के सामने बरामद साक्ष्यों का खुलासा नहीं किया, लेकिन सूत्रों की मानें तो मौके से कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो लूटे गए सोने से सीधे तौर पर जुड़े हो सकते हैं। प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ के दौरान टीम को यह जानकारी भी मिली कि उक्त आरओ प्लांट का मालिक गया शहर का ही एक व्यक्ति है।

पिछले दिनों हिरासत में लिए गए विनोद बरनवाल ने एसआईटी को बताया था कि उसे लूटे गए सोने के बिस्किट काटने के लिए इसी आरओ प्लांट में लाया गया था। विनोद के बयान के बाद ही यह स्थान जांच के दायरे में आया। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि विनोद बरनवाल के पास सोना गलाने या काटने का कोई वैध लाइसेंस नहीं है, इसके बावजूद उससे यह काम कराया गया।

  
सर्राफा मंडी से लेकर रेल थाना तक फैली साजिश, कई आरोपी अब भी फरार

विनोद बरनवाल की निशानदेही पर एसआईटी की टीम अगले ही दिन गया शहर के टावर चौक स्थित सर्राफा मंडी पहुंची थी। यहां बुलियन एसोसिएशन के गया जिला कोषाध्यक्ष और स्वर्ण व्यवसायी मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस को सूचना मिली है कि वह फिलहाल छत्तीसगढ़ में छिपा हुआ है।

इस पूरे कांड में आरओ प्लांट का मालिक मो. परवेज भी आरोपी है, जो अभी फरार चल रहा है। बताया जाता है कि जिस दिन इस कांड में छह आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, उसी दिन विनोद बरनवाल एसआईटी की हिरासत में था। पटना रेल मुख्यालय से एक पुलिस अधिकारी वारंट प्राप्त करने के लिए गया रेलवे कोर्ट पहुंचे थे।

गौरतलब है कि 21 नवंबर 2025 को हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस के साधारण बोगी में सफर कर रहे सोना-चांदी के व्यापारी मनोज सोनी के कूरियर में रखे करीब एक किलोग्राम सोने की लूट की गई थी। इस दौरान धनंजय शाश्वत नामक कारोबारी के कूरियर के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि गया रेल थाना के चार सिपाही, रेल थाना का पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा और परवेज ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।

  
करीब डेढ़ करोड़ की लूट ने पकड़ा हाई प्रोफाइल रूप, जांच में बरती जा रही गोपनीयता

करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के सोने की लूट का मामला सामने आने के बाद यह कांड हाई प्रोफाइल बन गया है। इसी कारण जांच से जुड़ी कई जानकारियां गोपनीय रखी जा रही हैं। एसआईटी से जुड़े अधिकारी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं, हालांकि अंदरखाने लगातार छापेमारी की जा रही है। गया, जहानाबाद और अरवल जिलों में फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

इस कांड में निवर्तमान रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। उनकी जमानत याचिका खारिज की जा चुकी है और अब गया व्यवहार न्यायालय में दोबारा जमानत याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

खबर लिखे जाने तक लूटे गए सोने की बरामदगी नहीं हो सकी है और गया रेल थाना के चार सिपाही समेत दो सिविलियन आरोपी परवेज और सीताराम की गिरफ्तारी भी बाकी है। हालांकि एसआईटी को मिल रहे इनपुट्स के आधार पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस बहुचर्चित सोना लूटकांड का पूरा खुलासा होगा और सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
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