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कैरव केस: झारखंड-बंगाल सीमा बनी अपहरणकर्ताओं का Safe coridor, पुलिस को उलझाने के लिए बुना लोकेशंस का चक्रव्यूह

cy520520 Yesterday 22:56 views 197
  

कैरव गांधी का आवास।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। लौहनगरी के युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अपराधियों की शातिराना रणनीति का खुलासा हो रहा है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि अपराधियों ने न केवल डिजिटल तकनीक (इंटरनेशनल कॉल) का सहारा लिया, बल्कि जमशेदपुर और आसपास की भौगोलिक स्थितियों का इस्तेमाल कर पुलिस को तीन जिलों की सीमा में उलझाने की सोची-समझी साजिश रची है।   
कांदरबेड़ा: अपराधियों का \“गोल्डन एस्केप रूट\“

चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा में कैरव की क्रेटा कार का मिलना महज इत्तेफाक नहीं है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कांदरबेड़ा अपराधियों के लिए एक रणनीतिक \“एग्जिटप्वाइंट\“ है।  

  •     ट्राइजंक्शन का लाभ: यह स्थान जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), सरायकेला-खरसावां और पश्चिम बंगाल की सीमा का मिलन स्थल है।
  •     बंगाल सीमा की निकटता: यहां से पश्चिम बंगाल का पुरुलिया और बलरामपुर जिला महज 30-40 मिनट की दूरी पर है। अपराधी          जानते हैं कि अंतरराज्यीय समन्वय में लगने वाले समय का लाभ उठाकर वे आसानी से सीमा पार कर सकते हैं।  
  •     दलमा के जंगल: एनएच-33 के किनारे स्थित डालमा के घने जंगल भी अपराधियों को छिपने या वाहन बदलने के लिए मुफीद जगह        उपलब्ध कराते हैं।  
  •     लोकेशन का मायाजाल: सोनारी और कांदरबेड़ा के बीच उलझी पुलिस  


अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को गुमराह करने के लिए \“डायवर्जनटैक्टिक्स\“ (ध्यान भटकाने की चाल) का सहारा लिया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा विरोधाभास मोबाइल और कार की लोकेशन को लेकर है:



  •     मोबाइल लोकेशन: कैरव के मोबाइल की अंतिम लोकेशन सोनारी के आदर्श नगर में मिली।
  •     कार की लोकेशन: उनकी क्रेटा कार शहर से दूसरी दिशा में चांडिल के कांदरबेड़ा में बरामद हुई।  
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष के नेतृत्व में गठित विशेष टीम का मानना है कि मोबाइल को जानबूझकर सोनारी में ऑन रखा गया या फेंका गया ताकि पुलिस का ध्यान शहर के भीतर केंद्रित रहे, जबकि असल में कैरव को चांडिल के रास्ते बाहर ले जाया गया। कार में चाबी का लगा होना इस बात की पुष्टि करता है कि वहां कैरव को किसी दूसरे वाहन में \“क्विक शिफ्ट\“ किया गया।   
अंतरराज्यीय पेशेवर गिरोह पर शक वारदात का तरीका किसी स्थानीय अपराधी का नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल अंतरराज्यीय गिरोह की ओर इशारा कर रहा है। जिस तरह से रेकी की गई, इंटरनेशनल व्हाट्सएप नंबर (+62) का इस्तेमाल हुआ और भागने के लिए एनएच-33 के भूगोल का इस्तेमाल किया गया, वह किसी बड़े सिंडिकेट की संलिप्तता दर्शाता है।   
पुलिस की \“घेराबंदी\“ और सीसीटीवी का सहारा

कोल्हान डीआईजी के निर्देश पर जमशेदपुर पुलिस ने अब पश्चिम बंगाल पुलिस से संपर्क साधा है। कांदरबेड़ा से बंगाल की ओर जाने वाले तमाम टोल प्लाजा और रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पुलिस उस \“कनेक्टिंग लिंक\“ की तलाश में है जो सोनारी और कांदरबेड़ा के बीच अपराधियों की आवाजाही को साबित कर सके।
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