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ईरान में होने वाली है जंग? ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी सेना का युद्ध अभ्यास; कुछ बड़ा होने वाला है

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ईरान में होने वाली है जंग ट्रंप की धमकी के बाद ईरानी सेना का युद्ध अभ्यास कुछ बड़ा होने वाला है (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। देशभर में सरकार विरोधी प्रदर्शनों, गिरती अर्थव्यवस्था और अमेरिका की सख्त चेतावनियों के बीच ईरान ने अपने तटवर्ती इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में लाइव फायरिंग सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है।

ईरान फारस की खाड़ी के तट पर और इराक व अजरबैजान से सटे इलाकों में लाइव गनफायर एक्सरसाइज कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इन अभ्यासों में ऐसे एटी-एयरक्राफ्ट गन शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल दुश्मन े विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

  
ईरानी पायलटों को चेतावनी जारी

पिछले एक हफ्ते में ईरान की विमानन एजेंसियों ने कम से कम 20 नोटिस टू एयरमैन (NOTAMs) जारी किए हैं। इनमें पायलटों को दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी ईरान के कुछ इलाकों में उड़ान न भरने की चेतावनी दी गई है।

जिन इलाकों को फायरिंग अभ्यास के लिए चुना गया है, वे ईरान के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इनमें कई क्षेत्र तेहरान से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर कोम के आसपास भी हैं।
अभ्यास वाले प्रमुख इलाके

  • फार्स गैस फील्ड
  • असालूयेह फारस की खाड़ी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एयरबेस
  • लावन द्वीप, जहां तेल और गैस की बड़ी सुविधाए हैं
  • चाबहार और दो छोटे बंदरगाह के पास के इलाके


इनमें से कुछ अभ्याल पहले ही शुरू हो चुके हैं, जबकि कुछ अगले हफ्ते होने हैं। ये घोषणाएं ऐसे समय में आई हैं जब देशभर में प्रदर्शन तेज हुए हैं और ईरानी मुद्रा की कीमत तेजी से गिरी है। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।

ज्यादातर NOTAMs में विमानों को 17 हजार फीट से नीचे न उड़ने की चेतावनी दी गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि ईरान दक्षिणी तट पर किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए सतर्क है। भारतीय सेना के पूर्व महानिदेशक (इन्फैंट्री) लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) संजय कुलकर्णी के मुताबिक, ये गन ऊंचाई पर उड़ रहे फाइटर जेट्स को मार गिराने में सक्षम नहीं हैं।

  
ईरान क्यों कर रहा यह अभ्यास?

हालांकि, वे अमेरिकी विमानों को ऊंचाई पर उड़ने के लिए मजबूर कर सकती हैं, जिससे वे ईरान के रडार पर ज्यादा साफ दिखाई देंगे। वहीं, भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी ग्रुप कैप्टन (रिटायर्ड) डॉ. डीके पांडे इसे अमेरिका और उके सहयोगियों के खिलाफ रक्षात्मक शक्ति प्रदर्शन बताते हैं। उनका कहना है कि ऐसे सैन्य अभ्यास फारस की खाड़ी से होने वाले व्यापार पर दबाव डाल सकते हैं।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों की हत्या करती है, तो अमेरिका बहुत सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरान के बाहर मौजूद मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि 28 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

\“ग्रीनलैंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं\“, ट्रंप ने फिर दोहराई \“कंट्रोल\“ वाली बात
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