आखिर क्या होती है क्लाइमेट एंग्जायटी? (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल आए दिन ग्लोबल वॉर्मिंग और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में अक्सर सुनने को मिल जाता है। जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिक भी अक्सर चेतावनी देते रहते हैं कि इसकी वजह से हमारा भविष्य खतरे में है। लेकिन अब इसके कारण एक मानसिक चुनौती भी उभरकर सामने आ रही है, जिसे ‘क्लाइमेट एंग्जायटी’ (Climate Anxiety) कहा जाता है।
चिंता की बात यह है कि इस समस्या से सिर्फ मानसिक सेहत ही प्रभावित नहीं हो रही है, बल्कि फैमिली प्लानिंग जैसे फैसले भी प्रभावित हो रहे हैं। जी हां, क्लाइमेट एंग्जायटी के कारण अब महिलाएं बच्चे पैदा करने से कतराने लगी हैं। आइए जानें क्या होती है क्लाइमेट एंग्जायटी और क्यों इसके कारण महिलाएं बच्चे प्लान नहीं करना चाहती हैं।
क्या है क्लाइमेट एंजाइटी?
क्लाइमेट एंजाइटी, जिसे \“इको-एंजाइटी\“ भी कहा जाता है, आने वाले पर्यावरणीय संकटों के डर से पैदा होने वाली एक गहरी मानसिक बेचैनी है। यह केवल भविष्य की चिंता नहीं है, बल्कि एक ऐसा डर है जो इंसान को हर पल यह महसूस कराता है कि आने वाली दुनिया रहने लायक नहीं बचेगी।
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) के अनुसार, यह चिंता उन लोगों में और ज्यादा गहरी हो जाती है जो माता-पिता बनने की सोच रहे हैं। उन्हें डर है कि उनके बच्चे एक ऐसी दुनिया में जन्म लेंगे जहां पीने का पानी, शुद्ध हवा और सुरक्षित वातावरण की भारी कमी होगी। हालांकि, यह चिंता बिल्कुल जायज है, लेकिन इसके कारण मानसिक सेहत पर पड़ने वाला असर काफी गंभीर है।
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महिलाओं में निःसंतान रहने की इच्छा क्यों बढ़ रही है?
क्लाइमेट एंजाइटी का सबसे गहरा असर महिलाओं के मातृत्व संबंधी फैसलों पर पड़ रहा है। ब्रिटेन की एक स्टडी के मुताबिक महिलाएं जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चे पैदा नहीं करना चाहती हैं। इसके पीछे ये डर छिपे हैं-
- भविष्य की अनिश्चितता- जब महिलाएं भविष्य को केवल एक \“खतरे\“ के रूप में देखती हैं, तो उनमें सुरक्षा की भावना खत्म हो जाती है। उन्हें लगता है कि परेशानियों से घिरी दुनिया में बच्चे को लाना उसके साथ अन्याय होगा। इसी डर के कारण कई महिलाओं ने गर्भपात जैसे कठिन फैसले भी लिए हैं।
- सामाजिक अलगाव और अकेलापन- एक रिसर्च के मुताबिक, 18 से 65 वर्ष की महिलाओं में क्लाइमेट एंजाइटी की वजह से अकेलेपन की समस्या बढ़ रही है। ऐसी महिलाएं अक्सर समाज से अलग-थलग महसूस करती हैं, क्योंकि उनकी चिंताएं और समाज की सामान्य जीवनशैली आपस में टकराती हैं।
- संसाधनों की कमी का डर- बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर और लगातार आने वाली आपदाएं यह संकेत देती हैं कि भविष्य में संसाधन कम होंगे। इस बारे में सोचकर महिलाओं में बच्चों के पालन-पोषण को लेकर घबराहट पैदा हो रही है।
क्या है बचाव के रास्ते?
क्लाइमेट एंजाइटी एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इससे उबरना संभव है। इससे बाहर निकलने के लिए कुछ प्रभावी उपाय अपना सकते हैं-
- प्रोफेशनल मदद- काउंसलिंग या साइकोथेरेपी के जरिए नकारात्मक विचारों के चक्र को तोड़ा जा सकता है।
- वर्तमान में जीना- दुनिया के भविष्य की ज्यादा चिंता करने के बजाय वर्तमान पर ध्यान देना जरूरी है।
- खुद के लिए दयालुता- यह समझना जरूरी है कि पर्यावरण की पूरी जिम्मेदारी अकेले आपकी नहीं है। छोटे-छोटे बदलाव करें लेकिन खुद को गिल्ट में न डालें।
- पॉजिटिव कम्युनिटी से जुड़ें- ऐसे समूहों का हिस्सा बनें जो पर्यावरण सुधार के लिए काम कर रहे हैं। इससे \“डर\“ की भावना \“एक्शन\“ में बदल जाती है।
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