जागरण संवाददाता, बांदा। आवारा कुत्तों को पकड़ने, उन्हें संरक्षित कर उनके जन्म देने की प्रक्रिया को रोकने आदि को लेकर शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल का अगले माह निर्माण शुरू हो जाएगा। 3.8 करोड़ की कीमत से बनने वाले इस एबीसी सेंटर में घूम रहे आवारा कुत्तों को डाग कैचर के जरिए पकड़ कर यहां संरक्षित किया जाएगा।
जहां बधियाकरण, टीकाकरण समेत रखने व भोजन आदि की सुविधा होगी, पालतू कुत्तों की नियमावली भी जल्द बनेगी। जिसके बाद उनके बधियाकरण के बाद उन्हें छोड़ा जाएगा। साथ ही नगर पालिका आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए 20 डाग कैचर नगर पालिका खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बांदा नगर पालिका मंडल की पहली ऐसी नगर पालिका होगी जहां पर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनेगा।
सेंटर निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद
शहर में मंडल का पहला एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद है। दरअसल बांदा व अतर्रा नगर पालिका समेत जिले में तिंदवारी, मटौंध, बबेरू, नरैनी, मटौंध, ओरन व बिसंडा नगर पंचायत हैं। इन पालिकाओं व नगर पंचायतों समेत पूरे जिले में आवारा घूम रहे कुत्ताें के पकड़ने से लेकर उनको आश्रय स्थल में रखने व उनके बधियाकरण कर उन्हें छोड़ने आदि के कोई संसाधन नहीं है।
इससे खूंखार कुत्ते जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज व स्कूलों में छुट्टा घूम रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुत्ता काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए संस्थागत क्षेत्रों, जैसे-स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, खेल परिसर और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बीते वर्ष अक्टूबर माह में दिया था। जिसके क्रम में नगर पालिका परिषद ने आवारा कुत्तों को पकड़ कर संरक्षित करने व उनके बधियाकरण को लेकर एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी सेंटर बनाने की दिशा में तेजी लाई।
कार्ययोजना तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव दो नवंबर माह में भेजा गया था, जिसकी संस्तुति शासन ने दे दी है। जल्द ही 3.8 करोड़ रुपये की लागत से शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का निर्माण शुरू होगा। जिसके तैयार होने से आवारा कुत्तों से पकड़ने से लेकर उन्हें संरक्षित करने, बधियाकरण, टीकाकरण आदि की व्यवस्था होगी। नगर पालिका के पास इन दिनों कुत्तों के पकड़ने के संसाधन भी नहीं है। जिस पर आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए 20 डाग कैचर खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की है।
अब तक हो चुकी दो मौतें, कई घायल
जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। न तो शहर और न ही ग्रामीण इलाकों में लोग सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं। बीते कुछ माह में आवारा कुत्तों के हमले से जहां दो लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं करीब 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
इनमें 60 से ज्यादा मामले केवल शहरी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में 190 से अधिक लोग कुत्तों का शिकार बन चुके हैं। 22 जुलाई को गिरवां के तीन वर्ष के मासूम कृष्णा को कुत्तों ने नोच डाला था। डीजे के शोर में बच्चे की चीखें भी नहीं सुनाई दीं। वहीं करीब छह वर्ष पहले मटौंध कस्बे के एक बुजुर्ग की कुत्ते के काटने से मौत हो चुकी है।
आवारा कुत्तों के बधियाकरण के लिए बर्थ सेंटर तैयार करने व पकड़ने के लिए डाक कैचर आदि के लिए कार्ययोजना की स्वीकृति शासन से मिल गई है। जल्द ही इसका निर्माण शुरू करवाया जाएगा। जल्द ही आवारा कुत्तों से लोगों को निजात मिलेगी। -श्रीचंद्र चौधरी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका |
|