जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में जहां एक ओर साधु-संतों की तपस्या, भजन-पूजन और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ संतों के भव्य शिविर और उनका रसूख भी चर्चा में है।
इसी कड़ी में सतुआ बाबा का आश्रम इन दिनों न सिर्फ आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए बल्कि पोर्शे और डिफेंडर जैसी लग्जरी गाड़ियों की वजह से भी सुर्खियों में है। यह महंगी लग्जरी गाड़ियां पोर्शे और डिफेंडर श्रद्धालुओं और मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही संतों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई हैं।
आमतौर पर त्याग, वैराग्य और सादगी के प्रतीक माने जाने वाले साधु-संतों के शिविर में इस तरह की आलीशान गाड़ियों की मौजूदगी लोगों को चौंका रही है। कई श्रद्धालु इन्हें देखने के लिए रुकते हैं, तस्वीरें लेते हैं और आपस में चर्चा करते नजर आते हैं।
नियमित रूप से होते हैं साधना और सेवा कार्य
हालांकि सतुआ बाबा के अनुयायियों का कहना है कि आश्रम में भजन-कीर्तन, साधना और सेवा कार्य नियमित रूप से होते हैं। बाबा संतोष दास के नाम से भी जाने जाते हैं और खाक चौक व्यवस्था समिति के महामंत्री के रूप में उनकी एक अलग पहचान है।
समिति के माध्यम से वे मेले की व्यवस्थाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि आधुनिक संसाधनों का उपयोग आध्यात्मिक जीवन के खिलाफ नहीं है बल्कि इससे व्यवस्थाएं और सेवाएं बेहतर ढंग से संचालित की जा सकती हैं।
माघ मेला क्षेत्र में कई अन्य साधु-महात्माओं के शिविर भी भव्य रूप में सजे हुए हैं। कहीं विशाल पंडाल, कहीं आकर्षक सजावट तो कहीं आधुनिक सुविधाएं देखने को मिल रही हैं। भजन-पूजन और प्रवचनों के साथ-साथ यह भव्यता भी माघ मेले के बदलते स्वरूप की झलक पेश कर रही है। साधु-संतों का यह नया अंदाज चौंकाता है। |