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प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या कम करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। सरकार की विभिन्न पहलों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और अब तक 60 हजार से अधिक ड्रॉपआउट छात्रों को दोबारा स्कूलों में नामांकित कराया जा चुका है।
सरकार की ओर से चलाए जा रहे ‘आसो स्कूल जिबा’ अभियान के तहत शिक्षकों ने घर-घर जाकर बाल तस्करी और स्कूल ड्रॉपआउट से जुड़ा सर्वे किया। इस सर्वे में राज्यभर के घरों को शामिल किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों ने करीब 18 लाख 30 हजार से अधिक ड्रॉपआउट छात्रों की पहचान की। इसके बाद अभिभावकों से लगातार संपर्क और काउंसलिंग कर छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
5,000 रुपये की आर्थिक सहायता
सर्वे में यह भी सामने आया कि ड्रॉपआउट छात्रों में बड़ी संख्या अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने माधो सिंह हाथ खर्च योजना लागू की है। इसके तहत कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले एसटी छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में उच्च शिक्षा की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से भाजपा नीत राज्य सरकार ने करीब 200 स्कूलों को उच्च माध्यमिक स्तर तक उन्नत किया है। इससे लंबे समय से चली आ रही बुनियादी ढांचे की कमी दूर होने की उम्मीद है।
मिड-डे मील योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में सरकार ने छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने और पोषण स्तर सुधारने के लिए मिड-डे मील योजना का विस्तार करते हुए इसे कक्षा 9 और 10 तक लागू किया है।
इसके अलावा, शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पिछले 18 महीनों में 21,515 शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है। सरकार ने अगले तीन वर्षों में 45 हजार और शिक्षकों की भर्ती करने की भी घोषणा की है। |
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