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मकर संक्रांति या सियासी दही-चूड़ा: तेजप्रताप के भोज में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, राबड़ी आवास बना अपवाद

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तेजप्रताप के भोज में सत्ता-विपक्ष आमने-सामने



डिजिटल डेस्क, पटना। मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति ने इस बार पारंपरिक उत्सव से कहीं आगे बढ़कर सियासी रंग ले लिया। जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर ऐसा मंच तैयार किया, जहां सत्ता और विपक्ष के नेताओं के एक साथ आने की संभावनाएं बन गईं। इस आयोजन ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

  

सीएम से लालू-तेजस्वी तक को खुला निमंत्रण

तेजप्रताप यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भोज का न्योता दिया है।

खास बात यह है कि तेजप्रताप ने न केवल अपने राजनीतिक परिवार बल्कि वैचारिक विरोधियों को भी आमंत्रित किया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश साफ झलकती है कि यह भोज सिर्फ धार्मिक या सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद का भी अवसर है।
एनडीए नेताओं के भी समानांतर आयोजन

इधर, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान और समाज कल्याण मंत्री रत्नेश सदा ने भी अपने-अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज रखा है। इन आयोजनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और एनडीए के कई मंत्री-नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का जरिया बनता दिख रहा है।

  

  
राबड़ी आवास पर सन्नाटा, बदली परंपरा

जिस राबड़ी आवास को वर्षों तक दही-चूड़ा भोज की पहचान माना जाता रहा, वहां इस बार सन्नाटा पसरा रहेगा। लालू यादव की गैरमौजूदगी में पहली बार यह परंपरा वहां नहीं निभाई जा रही। राजनीतिक जानकार इसे परंपरा के हस्तांतरण और नेतृत्व के बदलते संकेत के रूप में देख रहे हैं।

  
सात महीने बाद राबड़ी आवास पहुंचे तेजप्रताप

भोज से पहले तेजप्रताप यादव सात महीने बाद राबड़ी आवास पहुंचे। उन्होंने पिता लालू यादव, मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव को व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में लेकर स्नेह जताया। इससे पहले वे 1 जनवरी को राबड़ी देवी के जन्मदिन पर उनसे मिलने पहुंचे थे।

  
सत्ता-विपक्ष को एक मंच पर लाने की कोशिश

तेजप्रताप यादव के भोज की सबसे खास बात यह है कि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को आमंत्रित किया गया है। ऐसे नेताओं को भी बुलाया गया है, जिनकी राजनीति आरजेडी की विचारधारा के विपरीत मानी जाती है। इसे बिहार की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की आहट के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली में पिता से आशीर्वाद लेकर लौटे तेजप्रताप

पार्टी और परिवार से निष्कासन के बाद तेजप्रताप यादव ने दिल्ली में लालू यादव से मुलाकात कर भोज का निमंत्रण दिया था। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिता का आशीर्वाद मिल गया है और इसी उद्देश्य से वे दिल्ली गए थे।
साधु यादव को न्योता, पुरानी कड़वाहट पर विराम?

तेजप्रताप ने अपने मामा और पूर्व सांसद साधु यादव को भी भोज का न्योता दिया है। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐश्वर्या राय विवाद के दौरान साधु यादव के बयानों ने दूरी और बढ़ा दी थी। अब यह निमंत्रण राजनीति में नई दिशा का संकेत माना जा रहा है।
लालू की परंपरा, तेजप्रताप की नई पहचान

दही-चूड़ा भोज लालू यादव की राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रहा है। इस बार तेजप्रताप यादव उसी परंपरा को अपने अंदाज में आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि इस आयोजन के जरिए वे अपनी राजनीतिक मौजूदगी और स्वतंत्र पहचान को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं।

  
कल विजय सिन्हा के भोज में भी दिखे तेजप्रताप

दिलचस्प संयोग यह भी है कि एक दिन पहले ही तेजप्रताप यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए थे। एनडीए में आने के सवाल पर दोनों नेताओं के जवाबों ने सियासी उत्सुकता और बढ़ा दी है।
राज्यपाल से लेकर कई मंत्रियों को न्योता

तेजप्रताप यादव ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा सहित कई केंद्रीय और राज्य मंत्रियों को भी आमंत्रित किया है। वैचारिक विरोध के बावजूद यह न्योता बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति को खास बना रहा है।
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