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Makar Sankranti 2026 : इसलिए इस बार 15 को खुलेगा दान-पुण्य का महापर्व, सूर्य की चाल ने बदली परंपरा

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मिथिला पंचांग को मानने 14 को ही मना रहे त्योहार।फोटो (AI)



डिजिटज डेस्क, दरभंगा ।  सूरज की चाल ने इस बार मकर संक्रांति को थोड़ा खास बना दिया है। तारीख नहीं, आकाश में होता बदलाव तय कर रहा है कि पर्व कब मनाया जाएगा। जब संक्रांति रात में हो और पुण्य की शुरुआत सुबह से मानी जाए, तो उत्साह भी नए सिरे से जागता है। यही वजह है कि इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को पूरे विधि-विधान और उल्लास के साथ मनाई जाएगी।
तारीख नहीं, सूर्य तय करता है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति हर साल एक ही तारीख को नहीं आती, क्योंकि यह त्योहार कैलेंडर से नहीं सूर्य की चाल से जुड़ा होता है। जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तभी मकर संक्रांति मानी जाती है। इस साल सूर्य 14 जनवरी की रात करीब 8:45 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहा है।
रात में संक्रांति, सुबह में त्योहार

सूर्य का राशि परिवर्तन भले ही 14 जनवरी की रात को हो रहा हो, लेकिन रात में न तो गंगा स्नान संभव है और न ही दान-पुण्य। ऐसे में सवाल उठता है—तो असली मकर संक्रांति कब मानी जाए? इसका जवाब शास्त्रों में छिपा है।
उदया तिथि का शास्त्रीय नियम

हिंदू धर्म में किसी भी पर्व का निर्णय ‘उदया तिथि’, यानी सूर्योदय के समय की स्थिति से होता है। चूंकि 14 जनवरी की रात को संक्रांति हो रही है और उस दिन का सूर्योदय पहले ही निकल चुका होता है, इसलिए 15 जनवरी की सुबह मकर राशि में सूर्य का पहला सूर्योदय माना जाएगा। इसी कारण 15 जनवरी को ही स्नान-दान का विशेष महत्व है।
विज्ञान भी देता है यही संकेत

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो पृथ्वी की धुरी में होने वाले बदलाव के कारण हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन का समय थोड़ा आगे खिसकता जा रहा है। यही वजह है कि पहले मकर संक्रांति 13 जनवरी को होती थी, फिर 14 जनवरी और अब धीरे-धीरे 15 जनवरी को मनाई जाने लगी है।
15 जनवरी को ही पुण्य और परंपरा

इस साल 15 जनवरी की सुबह से ही पुण्य काल और महापुण्य काल शुरू हो जाएगा। यही समय स्नान, दान, जप-तप के लिए सबसे शुभ माना गया है। इसलिए इस बार खिचड़ी खाना, पतंग उड़ाना, तिल-गुड़ का दान और जरूरतमंदों की मदद 15 जनवरी को करना ही सबसे उत्तम रहेगा।
मिथिला में कुछ जगहों पर 14 को मकर संक्रांति

ज्योताषाचार्य डा. राम कुमार झा ने कहा कि मकर संक्रांति के दिन एकादशी व्रत भी है। लोक अवधारणा है कि एकादशी के दिन खिचड़ी नहीं खाया जाता है। बता दें कि मिथिला पंचांग के मुताबिक बुधवार को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। हालांकि बनारसी पंचांग मानने वाले गुरुवार को मकर संक्रांति मनाएंगे।
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