गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। कनाडा की शाही पुलिस की एक आंतरिक सुरक्षा रिपोर्ट में भारत के कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और उसके कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरोह अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कनाडा समेत कई देशों में सक्रिय होकर उगाही, नशीले पदार्थों की तस्करी, धन शोधन और सुपारी हत्या जैसे अपराधों को अंजाम दे रहा है।
रिपोर्ट में गिरोह को एक हिंसक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन बताया गया है, जो किसी धार्मिक या वैचारिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि पूरी तरह आपराधिक लाभ के लिए काम करता है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का संचालन भारत में जेल में बंद सरगना लॉरेंस बिश्नोई द्वारा किया जा रहा है, जो अपने नेटवर्क के माध्यम से विदेशों में भी अपराधों को निर्देशित करता है।
रिपोर्ट में 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का उल्लेख किया गया है। निज्जर को भारत सरकार आतंकवादी घोषित कर चुकी थी। उसकी हत्या के बाद मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक रूप ले लिया था। जांच के दौरान चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनसे पूछताछ अब भी जारी है।
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सुखदूल की हत्या की जिम्मेदारी भी ली
इसी तरह सितंबर 2023 में मैनिटोबा प्रांत के विन्निपेग शहर में सुखदूल सिंह की हत्या की जिम्मेदारी भी इसी गिरोह से जुड़ी बताई गई है। यह मामला दर्शाता है कि संगठित अपराध अब सीमाओं से परे जाकर काम कर रहे हैं और स्थानीय कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा संगठित अपराध गिरोहों का इस्तेमाल लक्षित हत्याओं और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था और संप्रभुता के सिद्धांतों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि यह प्रवृत्ति बढ़ती है, तो यह देशों के बीच अविश्वास और टकराव को और गहरा कर सकती है।
कनाडा-भारत संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कनाडा सरकार भारत के साथ व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने से यह प्रक्रिया जटिल हो गई है। एक ओर सुरक्षा एजेंसियां खतरे की बात कर रही हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक नेतृत्व संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
कनाडा के सिख संगठनों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है और सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संगठित अपराध को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया, तो इससे वहां रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा होगा।
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अब मामला सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल अपराध का नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि संगठित अपराध अब वैश्विक राजनीति का उपकरण बनता जा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रत्यर्पण व्यवस्था और सुरक्षा समन्वय की आवश्यकता और बढ़ जाती है।
यदि इस प्रकार के आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं होती, तो इससे केवल दो देशों के रिश्ते ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे पर भी असर पड़ेगा।
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