अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर “कुछ करने\“\“ की धमकी के बीच अमेरिकी कांग्रेस में एक बड़ा राजनीतिक कदम सामने आया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने और आगे चलकर उसे अमेरिकी राज्य बनाने से जुड़ा \“ग्रीनलैंड एनक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट\“ पेश किया है।
यह विधेयक राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अमेरिकी संघ में लाने के लिए “सभी आवश्यक साधनों\“\“ का उपयोग करने का अधिकार देने का प्रस्ताव करता है। वहीं, ग्रीनलैंड को अमेरिकी कब्जे में जाने से रोकने में डेनमार्क और ग्रीनलैंड जी जान से जुटे हुए हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्री बुधवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियों से मुलाकात करेंगे।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के हिस्से में नहीं आया तो आज नहीं तो कल वह रूस या चीन के कब्जे में चला जाएगा, जो कि अमेरिका या यूरोप के लिए अच्छी बात नहीं होगी।
सीनेट में विधेयक पेश करने वाले कांग्रेसमैन फाइन ने इस कदम को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए एक्स पर कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार, ग्रीनलैंड पर नियंत्रण से अमेरिका न केवल महत्वपूर्ण आर्कटिक शिपिंग मार्गों पर पकड़ बना सकेगा, बल्कि अपनी उत्तरी सीमा को भी सुरक्षित कर पाएगा।
इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका आसान तरीके से सौदा करना चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ी तो कठोर तरीका भी अपनाया जाएगा। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है, लेकिन ऐसा करना निश्चित रूप से प्राथमिकता में है।
क्या खास होगा विधेयक में?
विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को डेनमार्क से बातचीत कर ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में हासिल करने का अधिकार दिया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति को कांग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी राज्य के रूप में शामिल करने के लिए आवश्यक कानूनी बदलावों का विवरण होगा।
यह प्रक्रिया इस शर्त पर आधारित होगी कि ग्रीनलैंड एक ऐसा संविधान अपनाए जो अमेरिकी संविधान के अनुरूप और गणतांत्रिक स्वरूप का हो।
ग्रीनलैंड का विरोध जारी
हालांकि, ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों के नेताओं ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि द्वीप को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी अन्य देश द्वारा कब्जाया जा सकता है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार केवल वहां के लोगों का है।
ग्रीनलैंड के पीएम जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा कि हम एक भूराजनैतिक संकट का सामना कर रहे हैं और अगर हमें अमेरिका और डेनमार्क में से किसी को चुनना पड़ा, तो हम डेनमार्क को चुनेंगे। हम डेनमार्क साम्राज्य के साथ खड़े हैं।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
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