विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने रोहतास के तत्कालीन जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) द्वारा की गई कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें विभागीय मुख्यालय स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि डीएफओ ने बिना तथ्यों के उचित परीक्षण के 18 परिवहनकर्ताओं के भारी वाहनों को जब्त करने तथा उनकी नीलामी से संबंधित व्यापक आदेश पारित किए, जबकि वाहनों की रिहाई से जुड़ी रिट याचिकाएं न्यायालय में विचाराधीन थीं।
न्यायाधीश संदीप कुमार की एकलपीठ ने 18 रिट याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए सोमवार को उक्त आदेश पारित किया था।
न्यायालय ने कहा कि यह “गंभीर रूप से विचलित करने वाली प्रवृत्ति“ है कि रोहतास के तत्कालीन डीएफओ प्रद्युम्न गौरव ने लंबित मामलों के बावजूद जल्दबाजी में वाहनों की नीलामी कर दी और इस संबंध में न्यायालय को सूचित तक नहीं किया।
कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में भोजपुर (आरा) में पदस्थापित ऐसे अधिकारी को किसी जिम्मेदार पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती, ताकि राज्य की जनता को आगे किसी प्रकार की क्षति न हो।
कोर्ट ने इसी आधार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव को डीएफओ को दायित्व से मुक्त कर विभागीय मुख्यालय स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अनंत प्रसाद सिंह ने पीठ को अवगत कराया कि सरकार ने डीएफओ प्रद्युम्न गौरव के तबादले के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष इंट्रा कोर्ट अपील दायर की है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 27 जनवरी को होगी।
यह भी पढ़ें- जेडीयू नेता के बॉडीगार्ड वापसी पर पटना हाई कोर्ट सख्त, नीतीश सरकार से मांगा जवाब
यह भी पढ़ें- पटना हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पत्नी और बेटियों की हत्या में 20 साल की \“बिना रिहाई\“ सजा |
|