चार साल के युग का फाइल फोटो और उसके पिता जो न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विधि संवाददाता, शिमला। शिमला के बहुचर्चित युग हत्याकांड मामला आखिरकार देश की सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई के बाद अब तीनों ही आरोपितों के साथ राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में 27 फरवरी को फिर से सुनवाई होनी है।
चार साल के युग को पत्थर बांधकर पानी के टैंक में डुबो दिया था। आरोप है फिरौती के लिए उसे किडनैप किया गया था।
युग के पिता विनोद गुप्ता ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार ने इस मामले को चुनौती नहीं दी है, उन्होंने सरकार के अपील की है कि निचली अदालतों की तरह सर्वोच्च न्यायालय में भी उन्हें सहयोग मिले।
हाईकोर्ट ने मृत्युदंड बदला था आजीवन कारावास में
बता दें कि 23 सितंबर को हाईकोर्ट ने बहुचर्चित युग मर्डर केस के आरोपित तेजिंदर पाल सिंह को बरी करते हुए अन्य दो दोषियों के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदलने का फैसला सुनाया था। कोर्ट ने आरोपी तेजिंदर पाल सिंह द्वारा दायर अपील स्वीकार किया और उसे आरोपित अपराधों से बरी किया, जबकि चंदर शर्मा और विक्रांत बख्शी की दायर अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उन्हें युग को बंधक बनाने और उसका अपहरण कर फिरौती मांगने के अपराधों से बरी कर दिया।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा उन्हें दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का आदेश दिया और कहा कि उन्हें अपनी अंतिम सांस तक प्राकृतिक जीवन कारावास में जीना होगा।
पिता बोले, सरकार के भरोसे रहता तो न मिलता अधिकार
युग के पिता ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, सुप्रीमकोर्ट में सोमवार को इस मामले में सुनवाई हुई। युग के पिता ने इस मामले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए पूरी जंग लड़ूंगा। यदि मैं समय पर नहीं जाता और सरकार के भरोसे ही रहता तो मेरा फैसले को चुनौती देने का अधिकार के साथ बेटे की न्याय की लड़ाई ही खत्म हो जाती।
यह है युग मामला
युग की हत्या 21 या 22 जून 2014 की रात को टैंक में डुबोकर की गई थी। पहला फिरौती पत्र 27 जून 2014 को प्राप्त हुआ था। युग 14 जून 2014 को लापता पाया गया था, 14 से लेकर 27 जून तक कोई सूचना नहीं मिली। इन आरोपितों को 22 जनवरी 2015 को गिरफ्तार किया। इसके बाद मामले को सीआईडी को सौंप दिया। निचली अदालत ने इन्हें मौत की सजा सुनाई थी, इसे हाई कोर्ट ने बदल दिया व एक आरोपित को बरी कर दिया व दो के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
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