संवाद सूत्र, जागरण सादाबाद। शीतलहर व गलन अब फसलों के लिए खतरा बन गई है। रविवार की रात पाला ने खूब कहर बरपाया। सोमवार की सुबह जब किसान खेतों में पहुंचे तो वह पाले को देख चिंता में डूब गए। आलू की फसल को पाले से झुलस गई थी। पाला फस्लों के लिए खतरा बन गया है। आलू की सैकड़ों बीघा फसल इससे प्रभावित होने लगी है।
रविवार की रात से गिरने लगा था फसलों पर पाला
तापमान में गिरावट के चलते खेतों में पाला गिरने लगा है। सादाबाद क्षेत्रों के बिसावर, नौगांव बरामई, कजरौठी, ऊचांगाव, दगसह, कंजौली, गोविंदपुर, जारऊ सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों के गांवों में रविवार की रात पाला जम गया। इसकी जानकारी सोमवार सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे तब हुई। आलू की फसल पर बर्फ की सफेद चादर बिछी देख उनके होश उड़ गए। रातभर हवा बंद रहने से गिरते तापमान ने ऐसा असर दिखाया कि खेतों में नमी बनाए रखने के तमाम उपाय भी बेकार साबित हुए।
पाले से इस तरह होता है फसल को नुकसान
- पत्तियां झुलस जाती हैं और काली पड़ सकती हैं
- पौधों की बढ़वार रुक जाती है
- कंदों का विकास प्रभावित होगा
- पैदावार में 20 से 40 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका
- रोगों का प्रकोप बढ़ने का खतरा
पाले से गिर जाएगी आलू की पैदावार, किसान परेशान
किसानों ने पहले से ही खतरे को भांपते हुए पर्याप्त सिंचाई, खेतों के चारों ओर धूमनी जलाना, और सल्फर का छिड़काव जैसे सभी पारंपरिक व आधुनिक उपाय अपनाए थे, लेकिन प्रकृति के आगे उनकी एक न चली। ओमवीर सिंह,रामवीर सिंह,गंभीर सिंह विपिन चौधरी,सोनू चौधरी का कहना है कि खेतों में इतना पाला कभी नहीं देखा। इसी तरह पाला पड़ता रहा तो फसल बर्बाद हो जाएंगी। पाले का असर फसल की पत्तियों व कोशिकाओं पर पड़ता है। |