सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्लर्क की नौकरी लगवाने के नाम पर छह लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपित ने पीड़ित को गेट पास के साथ फर्जी ज्वाइनिंग लेटर पकड़ा दिया था। एक माह तक नौकरी करने के बाद आईकार्ड और वेतन न मिलने पर पीड़ित को शक हुआ। इस पर आरोपितों ने दो लाख रुपये और मांगे। तब युवक को शक हुआ पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत की। थाना उत्तर पुलिस तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है।
आरोपित ने पीड़ित को पकड़ा दिया था फर्जी गेट और नियुक्ति पत्र
रसूलपुर में गली नंबर सात निवासी विशाल कुमार प्रतियोगी छात्र हैं। उनकी मुलाकात रवि यादव निवासी कटीबरी चौराहा टापाकला जलेसर रोड, थाना उत्तर से एक स्कूल के दोस्त के माध्यम से हुई थी। बातचीत के दौरान रवि ने उसे हाईकोर्ट में क्लर्क की नौकरी लगवाने का झांसा दिया। इसके बदले में डेढ़ लाख रुपये की मांग की। बाकी रकम नियुक्ति पत्र मिलने के बाद किश्तों में देनी थी। इस पर भरोसा करके पीड़ित ने 28 दिसंबर 2024 को 50,000 हजार रुपये नकद दे दिए। तब आरोपित ने तीन जनवरी को विशाल के मोबाइल पर नियुक्ति पत्र सौंप दिया।
आईकार्ड और वेतन की मांग पर आरोपितों ने दो लाख रुपये और मांगे
दो दिन बाद 50 हजार रुपये और मांगे गए तो पीड़ित ने उसे दे दिए। इसके बाद उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट का गेट पास दिया। अलग-अलग तिथियों में कुल पांच लाख रुपये उसके पास भेज दिए। इसके बाद 28 जनवरी 2025 को किसी मो. आसिफ के नाम की आइडी देकर ट्रेनिंग की बात कहकर भेजा गया। जिस पर पीड़ित को शक हुआ। इलाहाबाद में दीपक नामक व्यक्ति के साथ रखकर हाईकोर्ट में दाखिल कराया गया। इसके बाद एक माह तक काम कराया गया। लेकिन इसके बाद बदले में कोई वेतन नहीं दिया गया और न ही आईकार्ड दिया।
आरोपित करता रहा टालमटोल
विशाल ने आरोपित से असली आइडी और वेतन न मिलने की शिकायत तो उसने दो लाख रुपये मांगे। लेकिन उसने रकम नहीं दी तो उसे वहां से हटा दिया गया। पीड़ित ने रवि से रुपये वापस मांगे तो वह टालमटोल करता रहा। इतना ही नहीं 20 अगस्त को उसने रकम देने से मना कर दिया और धमकाया कि तुम्हारे पैसे धोखाधड़ी से हड़ लिए गए हैं। अब तुम कुछ नहीं कर पाओगे। तब पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। इंस्पेक्टर अंजीश कुमार ने बताया कि नौकरी के नाम पर ठगी हुई है। जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है।
हाईकोर्ट से हटाए जाने के बाद एसबीआई का दिया था नियुक्ति पत्र
सीओ प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि पीड़ित छात्र ने प्रार्थना पत्र दिया था। आरोपित ने पहले हाईकोर्ट में नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया था। वहां से हटा दिए जाने के बाद उसने ईमेल के जरिए एसबीआई का नियुक्ति पत्र देकर पीड़ित को बरगलाता रहा। जांच के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपित की तलाश की जा रही है। |