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जेठ की दुपहरिया में छांव की तलाश में भटके थे मधेपुरा के चंद्रशेखर, 10 वर्षों में लगाए 20 हजार से अधिक पौधे

deltin33 2026-1-4 15:56:52 views 712
  

ग्रीन मैन चंद्रशेखर। (जागरण)



जागरण संवाददाता, मधेपुरा। समाजसेवी चंद्रशेखर की 10 साल पूर्व एनएच पर कार खराब हो गई थी। जेठ की दुपहरिया में जब वे छांव की तलाश में भटके तो दूर में एक पेड़ दिखाई दिया।

पेड़ की छांव में मिली राहत से उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि पेड़-पौधे क्यों जरूरी है। इसके बाद उन्होंने पौधारोपण को अभियान बना लिया।

विगत 10 वर्षों में इन्होंने न सिर्फ शहर बल्कि ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों, स्कूलों व चौक-चाैराहों पर फलदार व छायादार पौधे लगाने शुरू किए। अब तक वे 20 हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। जिसमें आठ-नौ हजार पौधे जीवित रह गए हैं। वे सभी पौधे बड़े हो चुके हैं।

लायंस क्लब व विभिन्न संस्थाओं से जुड़े चंद्रशेखर को अब ग्रीन मैन के नाम से पुकारा जाता है। जन्मदिन, वर्षगांठ आदि के मौके पर वे लोगों को उपहार स्वरूप पौधा भेंट करते हैं। इसके लिए इन्होंने खुद का एक नर्सरी भी बना रखा है।

चंद्रशेखर बताते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग समेत शहर की सड़कों व विभिन्न चौक-चौराहों पर नीम, बरगद, जामुन, अर्जुना के पौधे लगाए हैं। देखभाल के अभाव में अधिकांश पौधे सूख जा रहे हैं या फिर मवेशी खा जा रहे हैं। बावजूद अच्छी संख्या में पौधे बड़े हो चुके हैं।

इसके अलावा जिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों के अलावा जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज आदि जगहों पर भी फलदार पौधे यथा आम, कटहल, जामुन आदि के पौधे लगाए हुए हैं। जो अब बड़े हो चुके हैं। मेरा यह अभियान सालों भर जारी रहता है।मैंने खुद का नर्सरी बनाया हुआ है। इसी नर्सरी में पौधे तैयार कर पाैधारोपण अभियान चला रखा है।
कोरोना काल ने सीखाया पेड़-पौधे का महत्व

चंद्रशेखर बताते हैं कि कोरोना काल में प्रकृत्ति से उपहार स्वरूप मिलने वाला आक्सीजन जब लोगों को खरीदना पड़ रहा था तो वह मानस पटल को झकझोर दिया। इसके बाद हमने पे बैक टू सोसायटी को अपना ध्येय बना लिया। यानी हर व्यक्ति को समाज के लिए कुछ न कुछ करने का प्रण लेना चाहिए।

इसके बाद हमने चौक-चौराहों पर व सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर सर्वाधिक आक्सीजन का स्रोत माना जाने वाल नीम व बरगद के पौधे लगाने शुरू किए। अब यह हमारी दिनचर्या में शामिल हो चुका है। पौधे के संरक्षण को लेकर अगर प्रशानिक या फिर वन विभाग की पहल हो तो जिला मुख्यालय की सड़कों को नीम कॉरिडोर के तौर पर विकसित करने की योजना है।
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