प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, लखनऊ। किसी भी रेल हादसे के बाद उसकी जांच अब और गहन तरीके से होगी। रेलवे अधिकारी हादसे के बाद परंपरागत तरीके से जांच की जगह नए पहलुओं से भी उसकी पड़ताल करेंगे। इसके लिए छोटे-बड़े सभी हादसों के बाद घटनास्थल का ड्रोन से रिकॉर्डिंग कर साक्ष्य एकत्र होंगे। रेलवे बोर्ड ने पूर्वोत्तर रेलवे सहित सभी जोन को इसे लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैँ।
वर्ष 2024 में गोंडा हुए चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस हादसे के बाद रिपोर्ट के साथ जांच के तरीके में बदलाव करने की संस्तुति की गई थी।
हादसे के समय राहत कार्य पहुंचाने वाली दुर्घटना राहत ट्रेन (एआरटी) के कर्मचारियों को फारेंसिक विशेषज्ञों से वीडियोग्राफी, साइट अवलोकन की रिकॉर्डिंग एवं साक्ष्यों के संरक्षण का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। एआरटी में बचाव व राहत कार्य से जुड़े उपकरणों के साथ-साथ ड्रोन कैमरे भी रखे जाएंगे।
हादसे बाद अवरुद्ध रूट पर यातायात को बहाल करने और एरियल वीडियो तैयार किए जाएंगे। रोलिंग स्टाक को ऊपर से और स्पष्ट रूप से देखकर यह पता लगाया जाएगा कि कहीं हादसे कारण मैकेनिकल त्रुटि तो नहीं है।
गोंडा हादसे के बाद रेल संरक्षा आयुक्त ने ऐसी ही कई संस्तुतियां रेलवे बोर्ड से की है। बोर्ड ने इन संस्तुति को स्वीकृति देते हुए सभी जोन को एआरटी और ड्रोन से जुड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
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