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नोएडा एयरपोर्ट बना भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस प्रमाणित, शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तैयार होती यात्री टर्मिनल बिल्डिंग में प्राकृतिक प्रकाश और हवा के लिए तैयार विशेष कपड़े से तैयार छत। जागरण आर्काइव



जागरण संवाददाता, जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान तैयार किया जा रहा। एयरपोर्ट पर प्रत्येक महीने हवा,पानी, मिट्टी, कचरा और सीवेज के मानकों की निगरानी की जाएगी। यात्री टर्मिनल भवन को अलग तरीके से डिजाइन किया गया है जिससे ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम रखने में मदद मिलेगी।

आरएनजी प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिल सकेगी। जिससे सरकार के ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास के संकल्प को नई उड़ान देकर एयरपोर्ट पर कार्बन उत्सर्जन को शून्य रखते हुए देश का सबसे ग्रीन एयरपोर्ट बनाया जा सके।

  

नोएडा एयरपोर्ट पर तैयार होता सौलर फार्म। जागरण आर्काइव

प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) हवाई कनेक्टिविटी का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। साथ ही यह एयरपोर्ट पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप नोएडा एयरपोर्ट को भारत का पहला (आइजीबीसी) ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट बनने का गौरव मिला है।

ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से विकसित किए गए नेट-जीरो कांसेप्ट की बड़ी उपलब्धि है। यमुना प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट का यात्री टर्मिनल भवन इस तरह डिजाइन किया गया जिसमें ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत कम से कम हो सके।

एयरपोर्ट पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है। एयरसाइड संचालन के लिए प्रयोग होने वाले सभी वाहन 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक होंगे जिसके लिए चार्जिंग प्वाइंट्स जगह-जगह लगाए जाएंगे।
एयरपोर्ट की 50 प्रतिशत बिजली की जरूरतें सौर-पवन ऊर्जा से होंगी पूरी

सरकार के ग्रीन एनर्जी विजन को पूरा करने के लिए एयरपोर्ट पर 82.94 एकड़ में फैला सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है। जिसकी क्षमता 51,966 मेगावाट-घंटा होगी। जिससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त होगी।

साथ ही दो स्थानों पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड टिकाऊ जल स्रोत उपलब्ध कराएंगे। एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित हो सकेंगी। एयरपोर्ट पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कचरे के पृथक्करण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा देगी।
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