सरकारी फाइलों में \“वृद्धाश्रम\“ अनाथ। फोटो जागरण
संवाद सहयोगी, बगहा। बगहा नगर में असहाय और बेसहारा वृद्धों के लिए करीब दो दशक पहले ही वृद्ध आश्रम का निर्माण कराया गया था। तत्कालीन नगर परिषद के पूर्व सभापति विजय राम के कार्यकाल में वर्ष 2004-05 के दौरान वार्ड संख्या 31 और शास्त्री नगर में लगभग 65 लाख रुपये की लागत से दो वृद्ध आश्रम बनाए गए थे।
इनका उद्देश्य समाज और परिवार से ठुकराए गए वृद्धों को सुरक्षित आश्रय, भोजन और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना था। निर्माण के 20 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ये दोनों वृद्ध आश्रम आज तक संचालित नहीं हो सके। ये सरकारी भवन आज ‘सफेद हाथी’ बनकर खड़े हैं। यदि समय रहते इनका संचालन शुरू किया गया होता, तो संभव है कि सीताराम यादव की जान बच जाती। ऐसे कई बेसहारा वृद्ध यहां सुरक्षित जीवन जी सकते थे।
हर वर्ष ठंड के मौसम में नगर परिषद द्वारा अनुमंडलीय अस्पताल और अन्य स्थानों पर अस्थायी रैन बसेरे का संचालन किया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष रैन बसेरा शुरू करने में करीब डेढ़ महीने की देरी हुई। शास्त्री नगर और अस्पताल के सर्विस रोड के पास किसी तरह रैन बसेरा शुरू तो किया गया, लेकिन रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान को नजरअंदाज कर दिया गया।
रेलवे स्टेशन वह जगह है, जहां असहाय वृद्ध, भिखारी, मंदबुद्धि और बेसहारा लोग रात गुजारते हैं। इसके बावजूद न यहां रैन बसेरा बनाया गया और न ही अलाव की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। आमजन का कहना है कि इस मौत के लिए नगर परिषद, प्रशासन और सरकार तीनों समान रूप से जिम्मेदार हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आगे भी ऐसी दर्दनाक घटनाएं होती रहेंगी।
ठंड जनित बीमारी से हुई थी मौत
बगहा रेलवे स्टेशन परिसर में बीते गुरुवार की रात ठंड जनित बीमारी ने एक वृद्ध की जान ले ली। 58 वर्षीय सीताराम यादव, जो वर्षों से स्टेशन परिसर में भीख मांगकर जीवनयापन कर रहे थे। टिकट खिड़की के पास मृत पाए गए। उनकी मौत महज एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि व्यवस्था पर भी सवाल है। |