प्रसिद्ध चिकित्सक विनय कुमार झा के किए शोध में आया चौकाने वाला परिणाम
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिले में लोगों की जीवनशैली में तेजी से आए बदलाव का असर अब उनकी सेहत पर साफ दिखने लगा है। आधुनिकता की दौड़ में शारीरिक श्रम से दूरी, फास्ट फूड की बढ़ती आदत और व्यायाम की कमी ने कई गंभीर बीमारियों को जन्म दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में लोग खुद को स्वस्थ मान रहे हैं, जबकि वे अंदर ही अंदर गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं।
- खुद को स्वस्थ मान रहे 45% लोग निकले बीमार, रिसर्च में निकला परिणाम
- डा. विनय कुमार झा के द्वारा सात नवंबर से सात दिसंबर तक किया गया अध्ययन
- एक माह में लगभग 400 लोगों की जांच की गई, सामने आए हैरान करने वाले नतीजे
शहर के वरीय चिकित्सक डा. विनय कुमार झा ने इस स्थिति की पड़ताल के लिए एक माह का अध्ययन किया। इस दौरान उनके यहां इलाज कराने आए मरीजों के साथ आए स्वस्थ परिजनों की पैथोलाजी और रेडियोलाजी जांच कराई गई। करीब एक माह में लगभग 400 लोगों की जांच की गई, जिसमें हैरान करने वाले नतीजे सामने आए। जांच में पाया गया कि खुद को पूरी तरह स्वस्थ बताने वाले करीब 45 प्रतिशत लोग किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।
फैटी लिवर पहले, बीपी और पथरी दूसरे स्थान पर
डा. विनय कुमार झा ने सात नवंबर से सात दिसंबर तक यह अध्ययन किया। इसे शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों का एक सैंपल माना गया, ताकि जिले की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 83 लोग फैटी लिवर से पीड़ित पाए गए। इसके बाद 26 नए उच्च रक्तचाप (बीपी) और 22 किडनी स्टोन के मरीज सामने आए। वहीं मधुमेह के 15, टीबी के 12 मरीज भी जांच में मिले, जबकि शेष लोग अन्य बीमारियों से ग्रसित पाए गए।
लक्षण होते हुए भी नहीं करवा रहे थे स्वास्थ्य जांच
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कई लोग हैरान रह गए। उनका कहना था कि उन्हें कभी यह अहसास ही नहीं हुआ कि वे बीपी, मधुमेह या अन्य बीमारियों के शिकार हो चुके हैं। लोगों ने बताया कि किसी गंभीर परेशानी का अनुभव न होने के कारण उन्होंने कभी जांच कराना जरूरी नहीं समझा। हालांकि, बीपी के मरीजों ने गुस्सा अधिक आने और मधुमेह के मरीजों ने बार-बार पेशाब होने जैसे लक्षण स्वीकार किए, लेकिन इन्हें सामान्य मानकर अनदेखा करते रहे।
तनाव, फास्ट फूड और कम पानी बनी बीमारी की वजह
अध्ययन के दौरान डा. झा ने मरीजों की दिनचर्या, खानपान और आदतों की जानकारी भी ली। बीपी और मधुमेह के अधिकांश मरीज या तो व्यवसाय से जुड़े थे या नौकरीपेशा थे, जिनमें तनाव अधिक पाया गया। तनाव के कारण सिगरेट, गुटखा और फास्ट फूड का सेवन आम था। किडनी स्टोन के मरीजों ने दिनभर में दो लीटर से भी कम पानी पीने की बात कही। वहीं व्यायाम की कमी और असंतुलित भोजन के कारण फैटी लिवर के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। राहत की बात यह रही कि अधिकांश मामलों में फैटी लिवर ग्रेड-ए स्तर का पाया गया। डा. झा ने यह भी बताया कि महिलाओं में थायराइड की समस्या बढ़ रही है, लेकिन वजन बढ़ने को सामान्य मानकर वे इसे नजरअंदाज कर देती हैं।
जीवनशैली बदले बिना नहीं मिलेगी राहत
डा. विनय कुमार झा के अनुसार जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए खुद में बदलाव लाना जरूरी है। संतुलित आहार, भोजन में संयम, नियमित योग और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब भी सतर्कता नहीं बरती गई तो आने वाले समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। |
|