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TMBU : आंदोलन के मूड में हैं विशिष्ट शिक्षक, सिंडिकेट की बैठक के दौरान देंगे धरना, आत्मदाह की धमकी

deltin33 2026-1-13 01:26:12 views 481
  

TMBU: अतिथि शिक्षकों से बातचीत के दौरान कुलानुशासक व अन्य






जागरण संवाददाता, भागलपुर। टीएमबीयू में हटाए गए अतिथि शिक्षकों की बहाली को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के पास धरना दिया। धरना के जानकारी मिलने के बाद कुलानुशासक डा. एसडी झा व विश्वविद्यालय थाना की पुलिस पहुृंच गयी और उनसे धरना स्थल पर जाकर बैठने कहा। हालांकि धरना स्थल पर गंदगी होने की वजह से उसे साफ किया इसके बाद अतिथि शिक्षक राजीव कुमार, रंजन सिंह, दिलीप कुमार, गोपाल ठाकुर, फरत आलम आदि धरना पर बैठे।

इस दौरान राजीव ने कहा कि मारवाड़ी कालेज में मंगलवार को होने वाली सिंडिकेट की बैठक में भी वो धरना देंगे। इसके पत्र विश्वविद्यालय व पुलिस अधिकारी को दे दी गयी है। कुलानुशासक ने कहा कि धरना शांतिपूर्ण तरीके से दे और जो भी मांग है उसके पत्र के माध्यम से दे। दरअसल आत्मदाह की धमकी के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन सजग है।

  • धरना के जानकारी मिलने के बाद कुलानुशासक ने अतिथि शिक्षकों को समझा बुझाकर शांत कराया
  • मांग पूरी नहीं हुई तो आत्मदाह करेंगे, विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी जिम्मेदारी


पिछले दिन भी मांगों को लेकर धरना पर बैठे थे। धरना का समर्थन शिक्षक नेता डा.अजीत कुमार सोनू व अभाविप नेता कृणाल पाण्डेय ने भी दिया। राजीव ने कहा कि समाजशास्त्र विषय में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त अतिथि व्याख्याता की नियुक्ति रद कर मेरा नवीनीकरण की जाए। उन्होंने राज्यपाल सचिवालय के निर्देश का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से शीघ्र पुनर्विचार कर पुनर्बहाली की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी गई है।


अतिथि शिक्षकों का कहना है कि बहाली में हो रही देरी से उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है। कई शिक्षकों के सामने आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। ऐसे में वे पुनर्बहाली को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से त्वरित निर्णय की मांग कर रहे हैं।

अतिथि शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र पुनर्नियोजन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो 15 और 16 जनवरी को विश्वविद्यालय परिसर में तथा 13 और 17 जनवरी को मारवाड़ी महाविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, आमरण अनशन और आत्मदाह जैसे आंदोलनात्मक कार्यक्रम किए जाएंगे। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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