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अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर फिर पुलिस के कान खड़े! दाखिले के लिए आने वालों का होगा पुलिस वेरिफिकेशन

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अल फलाह यूनिवर्सिटी।  



जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। सफेदपोश आतंकियों का केंद्र बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई अल फलाह यूनिवर्सिटी ने अलग-अलग कोर्स के लिए ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया शुरू कर दी है। बीएससी सहित अलग-अलग डिप्लोमा कोर्स के लिए आवेदन निकाले गए हैं, इस बाबत जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर होने का दावा कर रही है।

डीसीपी एनआईटी की ओर से पूरी दाखिला प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए तीनों टीमों का गठन किया गया है, जो छात्रों का वेरिफिकेशन करेगी। छात्र अगर बाहर के राज्य का है तो संबंधित थाने में जाकर उसकी पूरी जांच पड़ताल होगी। इसके साथ स्टाफ नियुक्ति को लेकर भी पूरी जांच की जाएगी।

फरवरी से दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ की नियुक्ति शुरू हो जाती है। दाखिला लेने वाले छात्र को पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर संबंधित कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है और बाद में फोन करके काॅलेज में बुलाया जाता है।  
दाखिले को लेकर गैर शैक्षणिक स्टाफ की भी लगाई ड्यूटी

बता दें ठीक दो महीने पहले धौज गांव में स्थित यूनिवर्सिटी का नाम आतंकवादी गतिविधियों का संचालन करने वाली जगह के रूप में सामने आया था। यूनिवर्सिटी में कार्यरत डाॅक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी हुई थी और उसके धौज एवं फतेहपुर तगा गांव में ठिकानों से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 2900 किलो से अधिक अमोनियम नाइट्रेट, हथियार, कारतूस आदि बरामद किए थे।

डाॅ. मुजम्मिल से जब पूछताछ हुई थी तो डाॅ. शाहीन के बारे में पता चला जो यूनिवर्सिटी में ही कार्यरत थी और जांच में सामने आया तो उसका कनेक्शन आतंकवादी संगठन जैश से जुड़े होने के बारे में पता चला। डाॅ. मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद ही 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के बाहर धमाका हुआ था, जिसे डाॅ. उमर ने अंजाम दिया था और इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी।

इन घटनाओं के बाद से ही अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सुर्खियों में रहने लगा था। तब कई सहायक प्रोफेसर व डाॅक्टर यूनिवर्सिटी से इस्तीफा देकर चले गए थे। इस बीच ऐसी भी खबरें हैं कि ईडी द्वारा यूनिवर्सिटी की संपत्तियां अटैच की जा सकती हैं। खैर इन सबके बीच यूनिवर्सिटी की ओर से इस साल स्टाफ को लेकर भी नियुक्ति किए जाने की जानकारी सामने आई है।

दिल्ली धमाके के बाद बदनामी का दंश झेल रहे यूनिवर्सिटी प्रबंधन को दाखिला बढ़ाने एवं पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रबंधन की ओर से स्टाफ में शामिल सहायक प्रोफेसर और गैर शैक्षणिक स्टाफ की भी ड्यूटी लगाई है कि वह यूनिवर्सिटी की छवि सुधारने को लेकर काम करें।
कश्मीरी छात्रों का यूनिवर्सिटी को लेकर रहता है अधिक रुझान

अल फलाह यूनिवर्सिटी में 70 प्रतिशत स्टाफ कश्मीरी है। कश्मीरी छात्रों की संख्या भी 65 प्रतिशत है। हर साल कश्मीर के अलग-अलग जगहों से छात्र दाखिले के लिए यूनिवर्सिटी आते हैं।

दिल्ली धमाके के बाद जब एनआईए और दिल्ली पुलिस ने जांच यूनिवर्सिटी में जांच शुरू की तो जिन छात्राें और स्टाफ की आतंकी डाॅ. मुजम्मिल और उमर से फोन पर बातचीत हुई थी। उसमें से अधिकतर कश्मीरी ही शामिल थे। हालांकि पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया था।





अल फलाह यूनिवर्सिटी में दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति को लेकर पुलिस की पूरी नजर है। तीन टीमों का गठन किया गया है। बाहर के राज्यों से आने वाले प्रत्येक छात्र की वेरिफिकेशन होगी। स्टाफ की नियुक्ति को लेकर भी पुलिस निगरानी करेगी।


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-मकसूद अहमद, डीसीपी, एनआईटी
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