search

Change Makers@Jharkhand: 10 रुपये की बचत से संवर रही शिक्षा, तो कहीं 17 साल का युवा बुझा रहा झरिया की आग

deltin33 2 hour(s) ago views 489
  

बदलाव के पथ पर बढ़ते कदम: प्रिया कुमारी, अमिता कुमारी दिखा रहीं नई राह।



जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। ये हैं हमारे देश के युवा। इनकी उम्र भले ही कच्ची हो लेकिन सोच ऐसी जो समाज की सोच को बदलने की माद्दा रखती है।  

जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन सभागार इन दिनों एक ऐसी ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है जो समाज की पुरानी सोच को बदलने का काम भलीभांति कर रहे हैं।

टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय वार्षिक युवा मंच \“ध्वनि\“ में चार राज्योंझारखंड, ओड़िशा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगालसे आए 361 युवाओं ने अपनी कहानियों से सबको हैरान कर दिया है। इन युवाओं की उम्र भले ही कम है, लेकिन इनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य किसी बड़े बदलाव से कम नहीं हैं।  

कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरभ रॉय ने इन बच्चों को असली चेंज मेकर बताया, जो न केवल खुद आगे बढ़ रहे हैं बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं।

  

कुणाल कुमार सिंह और विवेक का तरीका भी चर्चा में।
पर्यावरण का प्रहरी: आग के बीच हरियाली की उम्मीद

धनबाद के जामाडोबा क्षेत्र के रहने वाले 17 वर्षीय कुणाल कुमार सिंह की कहानी पर्यावरण के प्रति अटूट समर्पण की मिसाल है। स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र कुणाल उस इलाके से आते हैं जो जमीन के नीचे धधकती आग (झरिया) के लिए जाना जाता है।  

इस गर्मी और तपन के बीच कुणाल ने बाघमारा, तितुरमारी और बोकारो के छह प्रखंडों में पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ अभियान छेड़ रखा है। वे अब तक 1200 से अधिक पौधे लगा चुके हैं और खास बात यह है कि वे पेड़ लगानेवालों को एक प्रमाण पत्र देते हैं।  

उन्हें संकल्प दिलाते हैं कि वे इस पौधे को अपने परिवार का हिस्सा मानकर पालेंगे। उनके लगाए बरगद, नीम और पीपल के पेड़ अब क्षेत्र में ठंडी छांव दे रहे हैं।
नुक्कड़ नाटक और दस रुपये की बचत से बड़ा बदलाव

समाज सेवा की इसी कड़ी में धनबाद के विवेक और जामाडोबा की अमिता कुमारी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। 19 वर्षीय विवेक ने जून 2025 में 25 युवाओं की टोली के साथ शारदा नाट्य मंच की शुरुआत की।  

वे नुक्कड़ नाटकों के जरिए ग्रामीणों को वज्रपात से बचाव और सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान कार्ड व राशन कार्ड का लाभ लेने के लिए जागरूक कर रहे हैं।  

वहीं 18 साल की अमिता कुमारी ने मात्र 10-10 रुपये की साप्ताहिक बचत से एक ऐसी मुहिम शुरू की है, जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को वापस स्कूल पहुंचा रही है। अमिता का स्वयं सहायता समूह शिक्षा के साथ-साथ नशाबंदी और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी डटा हुआ है।
डिजिटल युग की चुनौतियों से लड़ती 15 साल की प्रिया

आज के दौर में जब बच्चे ऑनलाइन गेमिंग की लत का शिकार हो रहे हैं, तब वेस्ट बोकारो की 15 वर्षीय प्रिया कुमारी एक मशाल लेकर निकली हैं।  

प्रिया न केवल स्कूलों में बल्कि पंचायतों में जाकर भी युवाओं को ऑनलाइन गेम से होने वाले मानसिक और शारीरिक नुकसान के प्रति सचेत कर रही हैं।  

वे बच्चों को समझाती हैं कि लगातार मोबाइल पर गेम खेलने से उनकी एकाग्रता भंग होती है और वे चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। प्रिया की यह छोटी सी उम्र में बड़ी सोच समाज को एक नई दिशा दे रही है।
प्रमुख बिंदु: \“ध्वनि\“ कार्यक्रम का उद्देश्य

  • सहभागिता: झारखंड, ओड़िशा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के युवा शामिल।
  • मंच: युवाओं को अपनी सफलता की कहानियां और सामाजिक बदलाव के अनुभव साझा करने का अवसर।
  • विस्तार: नुक्कड़ नाटक, शिक्षा, पर्यावरण और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर।

इन युवाओं से क्या सीखें?

संसाधन सीमित होने के बावजूद नीयत साफ हो तो बदलाव संभव है।

  • छोटी सी बचत (जैसे अमिता की 10 रुपये वाली मुहिम) बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकती है।
  • कला और नाटक (जैसे विवेक का नाट्य मंच) जटिल सरकारी योजनाओं को सरल बनाकर जनता तक पहुंचा सकते हैं।
  • तकनीक के दौर में प्रिया की तरह डिजिटल स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना समय की मांग है।
  • कुणाल की तरह प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को \“पारिवारिक संकल्प\“ बनाना ही पर्यावरण संरक्षण का असली रास्ता है।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
460554

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com