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हरियाणा में लंबे समय से राज्य सुरक्षा आयोग नहीं, पुलिस स्थापना कमेटी भी न बनी; नए DGP के सामने क्या है चुनौती?

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हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस (संशोधन) कानून 2018 की अनुपालना में आज तक राज्य सुरक्षा आयोग (स्टेट सिक्योरिटी कमीशन) का गठन नहीं हो पाया है। यह संशोधित पुलिस कानून सात साल पहले 10 जनवरी 2019 को लागू हुए थे।

संशोधित कानून में पुलिस स्थापना कमेटी का भी प्रविधान है, जिसे आज तक पूरा नहीं किया जा सका है। हरियाणा के नये पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के सामने पुलिस सुधारों को लागू करने के साथ-साथ राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना कमेटी का गठन किसी चुनौती से कम नहीं है।

उनके सामने यह चुनौती उस स्थिति में अधिक है, जब उन्होंने कार्यभार संभालते ही पुलिस कल्याण के कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने गृह विभाग में आरटीआइ दायर कर राज्य सुरक्षा आयोग के गठन के बारे में जारी गटज नोटिफिकेशन की कापी और उससे पूर्व हुई बैठकों का ब्योरा मांगा था, जिसके जवाब में कहा गया कि गृह विभाग द्वारा ऐसा आयोग गठित करने के बारे में कोई नोटिफिकेशन प्रकाशित नहीं किया गया है।

राज्य सुरक्षा आयोग के कार्यों में हरियाणा सरकार द्वारा पुलिस कानून का उपयुक्त क्रियान्वयन करवाना, प्रदेश में कार्यकुशल, प्रभावी और जवाबदेही पुलिसिंग सुनिश्चित करना और प्रदेश पुलिस के संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा और मूल्यांकन करना शामिल है।

राज्य सुरक्षा आयोग के चेयरमैन मुख्यमंत्री होते हैं, जबकि वाइस चेयरमैन गृह मंत्री होते हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता, एक रिटायर्ड हाई कोर्ट का जज, एडवोकेट जनरल, मुख्य सचिव, गृह सचिव, राज्य के पुलिस महानिदेशक और दो गैर-सरकारी सदस्य भी आयोग में शामिल किए जाने का प्रविधान है। दो गैर सरकारी सदस्यों में एक रिटायर्ड आइएएस का होना जरूरी है।

आरटीआइ के दूसरे बिंदु में गृह विभाग से पुलिस स्थापना कमेटी की गजट नोटिफिकेशन और बैठकों की जानकारी मांगी गई थी, जिसके जवाब में बताया गया कि ऐसी कोई कमेटी आज तक नहीं बनी है और न ही कोई नोटिफिकेशन जारी हुआ है।


हेमंत कुमार के अनुसार पुलिस महानिदेशक इस कमेटी के चेयरमैन होते हैं, जबकि सदस्यों में सीआइडी प्रमुख, पुलिस मुख्यालय के प्रशासनिक विंग के प्रमुख एवं ला एंड आर्डर (कानून-व्यवस्था) के मुखिया शामिल किए जाते हैं।

यह कमेटी पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर (निरीक्षक) रैंक के कर्मियों की तबादले एवं तैनाती संबंधी निर्णय लेती है, जबकि डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) एवं एसपी (पुलिस अधीक्षक) की तैनाती/तबादलों के संबंध में यह कमेटी राज्य सरकार को अपनी सिफारिश करती है।

हेमंत कुमार ने हैरानी जताई कि उनकी आरटीआइ को यह कहते हुए आगे सरका दिया गया कि अगली कार्यवाही के लिए पुलिस महानिदेशक के कार्यलाय में संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना कमेटी का गठन राज्य सरकार के गृह विभाग द्वारा किया जाता है।

हालांकि बाद में पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से भी यही जवाब दिया गया कि न तो राज्य सुरक्षा आयोग का गठन हुआ है और न ही पुलिस स्थापना कमेटी की कोई नोटिफिकेशन जारी हुई है।
प्रकाश सिंह केस में छह प्रमुख प्रविधानों में शामिल हैं यह दोनों प्रविधान

हेमंत कुमार के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा करीब साढ़े 19 वर्ष पूर्व 22 सितंबर 2006 को उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह केस में देश में पुलिस सुधारों पर ऐतिहासिक निर्णय दिए गए हैं। इन छह प्रमुख निर्देशों में हर राज्य में स्टेट सिक्योरिटी कमीशन अर्थात राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना कमेटी गठित करना जरूरी है।

कोर्ट के निर्णय के बाद हरियाणा की तत्कालीन हुड्डा सरकार ने विधानसभा द्वारा हरियाणा पुलिस कानून 2007 पारित करवाया परंतु उसकी मूल धारा 26 में राज्य पुलिस बोर्ड का प्रविधान कर दिया। इस धारा को पूर्णतः संशोधित कर भाजपा सरकार द्वारा पिछले कार्यकाल के दौरान राज्य सुरक्षा आयोग किया गया।

हालांकि आज तक उसका गठन नहीं किया जा सका है। हेमंत कुमार ने बताया कि दिसंबर 2006 में तत्कालीन हुड्डा सरकार द्वारा राज्य पुलिस बोर्ड नोटिफाई किया गया था परंतु उसकी संपन्न बैठकों के बारे में भी गृह विभाग के पास आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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