प्रशासन ने आवासीय वृद्धाश्रम और वित्तीय सहायता जैसी पहल की हैं।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। वह दिन बीत गए जब बड़े बुजुर्गों को घर का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था और उन्हें सम्मान दिया जाता था। अब बुजुर्ग अपने ही घरों में दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं। घाटी में यह मुद्दा हाल ही में तब सुर्खियों में आया जब एक परेशान करने वाला वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति को कथित तौर पर उसके अपने बेटे द्वारा प्रताड़ित करते हुए दिखाया गया था।
इस फुटेज ने सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश पैदा किया और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और मामला दर्ज कर लिया। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई वरिष्ठ नागरिक उपेक्षा, शारीरिक दुर्व्यवहार और वित्तीय शोषण का शिकार होते हैं, और अक्सर वे इस बारे में खुलकर बोलते भी नहीं हैं।
सलाहकार मनोचिकित्सक डा. एजाज सुहाफ ने कहा, उपेक्षा और अकेलापन इस चिंताजनक वृद्धि के मुख्य कारण हैं। कई बुजुर्ग डर, परिवार के सदस्यों के प्रति वफादारी या ऐसे खुलासे से जुड़े कलंक के कारण चुप रहना पसंद करते हैं। यह चुप्पी दुर्व्यवहार को बेरोकटोक जारी रहने देती है।
कश्मीर विश्वविद्यालय द्वारा 2023 में किए गए एक अध्ययन में, जिसमें 27,000 से अधिक बुजुर्ग प्रतिभागियों को शामिल किया गया था, पाया गया कि लगभग 50 प्रतिशत ने किसी न किसी प्रकार के दुर्व्यवहार का सामना किया था - जिसमें उपेक्षा से लेकर वित्तीय शोषण तक शामिल था।
गरिमा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता कम होती जा रही
कई लोगों ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक अकेला छोड़ दिया जाता था, पर्याप्त देखभाल से वंचित रखा जाता था या उनकी दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें पूरी तरह से देखभाल करने वालों पर निर्भर बना दिया जाता था, जिससे धीरे-धीरे उनकी गरिमा, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता कम होती जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि घाटी में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं का कारण बदलती पारिवारिक संरचनाएं, काम की तलाश में युवा सदस्यों का पलायन, बढ़ती वित्तीय निर्भरता और सामाजिक अलगाव है - ये सभी आर्थिक तनाव और क्षेत्र के लंबे समय से चल रहे संघर्ष से और भी जटिल हो गए हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार होने वाला दुर्व्यवहार, चाहे वह भावनात्मक, शारीरिक या आर्थिक हो, दीर्घकालिक बीमारी, अवसाद, चिंता, सामाजिक अलगाव और यहां तक कि असमय मृत्यु का कारण बन सकता है।
श्रीनगर में बुजुर्गों के साथ काम करने वाले एक वरिष्ठ परामर्शदाता ने कहा, बुजुर्ग अक्सर डर या शर्म के कारण चुप रहते हैं, लेकिन यह चुप्पी उपेक्षा को जानलेवा स्थिति में बदल सकती है। परिवारों और समुदायों को दुर्व्यवहार को पहचानना और बहुत देर होने से पहले हस्तक्षेप करना सीखना चाहिए। मनोचिक्तसक डा यासिर अहमद राथर ने कहा,उनके पास बुगुर्ग मरीजों की संख्या बीते दो तीन र्वषों के दौरान बढ़ गई है।
बुजुर्ग मरीजों में सबसे अधिक मानसिक रोग होते हैं
उन्होंने कहा, एनजाइटी, डिप्रेशन तथा एजाइमर ऐसे बुजुर्ग मरीजों में पाए जाने वाले सबसे अधिक मानसिक रोग होते हैं। उन्होंने कहा,ऐसे रोगियों को प्यार, स्नेद तथा उचित देखभाल की जरूरत होती है। लेकिन सही से उनकी देखभाल न किए जाने से उनको पैनिक अटेैकों का ज्यादा खतरा रहता है। उन्होंने कहा, इन मरीजों की फेमिली हिस्ट्री से यही बात सामने आई कि यह परिवार में लापरवाही के शिकार रहे हैं।
जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए उपाय शुरू किए हैं। 19 जिलों में आवासीय वृद्धाश्रम स्थापित किए गए हैं, जो परिवार के सहारे के बिना बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, मनोरंजन सुविधाएं और सुरक्षित स्थान प्रदान करते हैं। 2024-25 के दौरान, कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से 72 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय सहायता और चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। |