भारत मंडपम लगे विश्व पुस्तक मेले में रविवार को उमड़ी भीड़। फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्र
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। World Book Fair 2026: जिन्हें अक्सर स्क्रीन की पीढ़ी कहकर किताबों से दूर मान लिया गया था, वहीं, जेन-जी प्रगति मैदान अपनी उंगलियों से पिक्सल्स के बजाय कागज के पन्नों में अपना भविष्य खंगालते नजर आए। अक्सर तकनीक और गैजेट्स के शोर में खोए रहने का ताना सुनने वाले जेन जी विश्व पुस्तक मेले में ज्ञान के सागर में गौते लगाते नजर आए।
डिजिटल चमक के बीच किताबों के शब्दों की गहराई को टटोलते दिखे। मेले के दूसरे दिन अपनी पसंदीदा किताबों को ढूंढते युवाओं ने बताया कि तकनीक चाहे जितनी तरक्की कर लें, लेकिन सुकून आज भी किताबों में बंद ज्ञान से ही मिलता है।
वहीं, कतर पवेलियन में हिंदी और उर्दू के हवा में तैरते अक्षरों को देख तकनीक में निपुण युवा भी एक पल के लिए ठहर कर इस जादुई दुनिया को निहारने लगे। इन आधुनिक युवाओं को रस्साकसी, खो-खो और आंख-मिचौली जैसे लुप्त होते पारंपरिक खेलों और गायब होते पक्षियों की जानकारी में डूबे दिखे।
मेले में जैन- जी किताबों को तलाशने के साथ ही एकांत में बैठकर इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यात्रा वृत्तांतों की नई दुनिया के बारे में, प्रेम और चर्चित अपराधिक गाथाओं और क्लासिक साहित्य के पन्ने पलटते भी नजर आए। वहीं, दूसरी ओर बुजुर्ग भी किताबों के बीच बने सेल्फी पाइंट पर अपनी मुस्कुराहटें कैद कर अपना बचपन जीते दिखे।
बातचीत में क्या बोले युवा?
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तकनीक और किताबों का यह मिलन ने उन लोगों के लिए एक संदेश है जो कहते थे कि जैन- जी रील के दौर में पन्ने पलटने का धैर्य खो बैठे है।
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- अनुराग, युवा
विश्व पुस्तक मेले में किताबों से लेकर डिजिटल लाइब्रेरी हो या भारतीय सेना की गौरव गाथा सब कुछ एक ही छत के नीचे मौजूद है। यहां ज्ञान, तकनीक और सेना के शौर्य गाथा काफी कुछ जाना है।
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-आरवी बेनर्जी, बच्चा
जेन- जी के हाथों में मोबाइल भले हो पर उनके दिल में आज भी किताबों के लिए एक मुकम्मल जगह सुरक्षित है। इसे हम केवल ज्ञान के लिए नहीं बल्कि मानसिक सुकून के लिए भी पढ़ रहे है।
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- अनिंदिता घोष, महिला
डिजिटल समय की मांग है लेकिन किताब ज्ञान का सागर है। जैन- जी के लिए दोनों चीजें समान महत्व रखती है।
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- अनुष्का राय चौधरी, युवती |