दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित पाठक पैनल के दौरान अपने विचार रखते लोग। जागरण
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में बढ़ते जल प्रदूषण और घटते भूगर्भ जल स्तर की समस्या को लेकर दैनिक जागरण द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में समस्या एवं इसके समाधान पर चर्चा के लिए रविवार को आरडीसी स्थित दैनिक जागरण कार्यालय में पाठक पैनल का आयोजन किया गया।
जिसमें विभिन्न कार्यक्षेत्रों से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे। सभी ने एकमत होकर कहा कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित जल को सीधे भूगर्भ में डालने पर रोक लगाई जानी चाहिए। यह जल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है।
समाजसेवी ममता सिंह ने कहा कि जल प्रदूषण की यह स्थिति है कि आरओ में तीन माह में ही फिल्टर बदलना पड़ रहा है। बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में लोगों का एक बड़ा बजट स्वास्थ्य पर खर्च हो रहा है।
वहीं गौरव बंसल ने कहा कि प्रदूषित जल पीने से शहर में लोग बीमार हो रहे हैं। उनको पेट संबंधी एवं अन्य समस्याएं हो रही हैं। जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान हीं हो पा रहा है।
इसके अलावा कृष्णपाल पांचाल ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रसायनयुक्त जल सीधा जाकर भूगर्भ जल को दूषित कर रहा है। जल प्रदूषण की समस्या का यही सबसे बड़ा कारण हैं। इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। इसके अलावा ज्योति तोमर, सरिता सेमवाल, राकेश सैन, अशोक कुमार, अचिरतोष मिश्र, मोनू त्यागी, शिवम त्यागी आदि ने भी जल प्रदूषण एवं घटते जल स्तर पर अपने विचार साझा किए।
शोधित जल का करें इस्तेमाल
आइएमए की अध्यक्ष डा. अल्पना कंसल ने कहा कि प्रदूषित जल की समस्या पर कितनी भी तेजी से काम होगा इसके बाद भी समाधान में समय लगेगा। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए आरओ वाटर का इस्तेमाल करना चाहिए। आरओ में भी समय पर फिल्टर चेंज करना जरूरी है। जिससे जल का सही शोधन सुनिश्चित हो सके और खुद को बीमारियों से बचा सकें।
तीन बिंदुओं पर सुझाए समाधान
कर्नल टीपी त्यागी ने कहा कि गाजियाबाद में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां हैं। जिनमें एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगा हुआ है, लेकिन इसको संचालित नहीं किया जाता है। फैक्ट्री से निकला रसायनयुक्त पानी शोधित करने की बजाय सीधा छोड़ दिया जाता है। यह अपशिष्ट जल सीधा भूगर्भ जल को प्रदूषित करता है।
गाजियाबाद में उद्योग इकाई 30 हजार हैं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अधिकारी तीन हैं। ऐसे में ईटीपी संचालित हैं या नहीं उनके औचक निरीक्षण के लिए सिविल सोसायटी के लोगों को नामिनेट किया जाता चाहिए। जो औचक निरीक्षण कर उद्योग इकाइयों में ईटीपी की स्थिति की रिपोर्ट बोर्ड को दे सकें।
इसके अलावा सोसायटियों में जल दोहन की मीटरिंग होनी चाहिए। जिससे जल के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा नगर निगम द्वारा क्यूआरटी क्विक रिस्पांस टीम बनाई जानी चाहिए। जो पानी की समस्या के समाधान के लिए तैनात की जाएं। |
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