गर्मियों में जल संकट के आसार। नैनी झील
जागरण संवाददाता, नैनीताल। शीतकाल में मौसम की बेरुखी से कोई अछूता नहीं है। वर्षा नहीं होने से जहां काश्तकार परेशान हैं तो यह बेरुखी नैनी झील पर भी भारी पड़ रही है। मानसून के बाद वर्षा व बर्फबारी नहीं होने से प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो सके हैं। जिसके चलते झील का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यही कारण है कि बीते पांच वर्षों में झील सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। झील का जलस्तर 83.7 फीट बना हुआ है। यही आलम रहा तो गर्मियों में जलसंकट व झील का जलस्तर सामान्य से नीचे जाने से जिम्मेदारों की चिंता बढ़ना तय है।
बता दें कि शहर में मानसून के दौरान सामान्य वर्षा होने बाद झील लबालब भर जाती है। मानसून खत्म होने के बाद शुरुआती शीतकाल तो सूखा ही बीतता है, लेकिन नवंबर अंत से वर्षा व दिसंबर से बर्फबारी का सिलसिला शुरु हो जाता है। जिससे शहर के पर्यटक कारोबार के साथ ही जल स्रोत रिचार्ज होने से नैनी झील को भी संजीवनी मिलती है। लेकिन बीते मानसून के बाद नौ अक्टूबर के बाद शहर में सूखा पड़ा है।
करीब तीन माह से वर्षा की एक बूद नहीं गिरी तो बर्फबारी तो मानो शहरवासियों के लिए सपना बन गई है। जिसका सीधा असर झील के जलस्तर पर भी पड़ रहा है। प्राकृतिक जलस्रोत रिचार्ज नहीं होने से झील के जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आ रही है। रविवार को झील का जलस्तर 83.7 फीट बना हुआ है। जोकि बीते पांच वर्षों में सबसे कम है।
बीते पांच सालों में 11 जनवरी को यह रहा झील का जलस्तर
- वर्ष - जलस्तर
- 2026- 83.7
- 2025- 84.4
- 2024- 84.4
- 2023- 84.6
- 2022- 86.5
यह भी पढ़ें- मानसिक रुप से विक्षिप्त महिला नैनी झील में कूदी, नाव चालक व पुलिस ने बामुश्किल बचाई जान
यह भी पढ़ें- नैनीताल की नैनी झील में उतराता मिला युवक का शव, 25 दिसंबर से था लापता
यह भी पढ़ें- नैनीताल की नैनी झील में कृत्रिम आक्सीजन प्रणाली तंत्र की डिस्क ट्यूब जर्जर, नए बुलबुले देंगे जलजीवन को नवश्वसन |
|