जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण देते समय यह नहीं माना जा सकता कि पत्नी कमा रही है या अपना खर्च उठाने में सक्षम है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि महिला ने सिर्फ 11वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और बिना किसी सुबूत के पति का सिर्फ दावा इस स्तर पर कोई मदद नहीं कर सकता। पीठ ने कहा कि अदालत की राय है कि अंतरिम भरण-पोषण देने के मकसद से याचिकाकर्ता-पत्नी को कमाने वाली या अपना खर्च उठाने में सक्षम नहीं माना जा सकता।
कोई दस्तावेज नहीं कर सका पेश
अदालत ने उक्त टिप्पणी पारिवारिक अदालत के निर्णय को चुनौती देने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। महिला को पारिवारिक अदालत ने प्रति माह 2,500 रुपये का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने दावा किया कि याचिकाकर्ता पत्नी नर्सरी टीचर के तौर पर काम कर रही थी, लेकिन उसने कोई दस्तावेजी सुबूत रिकाॅर्ड पर पेश नहीं किया।
2022 में ससुराल वालों ने घर से महिला को निकाला
पारिवारिक कोर्ट ने मार्च 2024 में महिला की याचिका पर क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 125 (पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण के लिए आदेश) के तहत उसे हर महीने 2,500 रुपये का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। दोनों की जून 2021 में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी हुई थी और पत्नी ने दावा किया कि इसके तुरंत बाद उसे ससुराल में दहेज की मांगों को लेकर क्रूरता हुई और 2022 में ससुराल से उसे निकाल दिया गया था।
मिनिमम वेज के आधार पर बढ़े अंतरिम भरण-पोषण
महिला ने कहा कि 2,500 रुपये प्रति माह अपर्याप्त और नाकाफी है। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि बताई गई आय एक कुशल व्यक्ति को मिलने वाली मिनिमम वेज से भी कम थी। अदालत ने कहा कि पति की आय का आकलन मिनिमम वेज के आधार पर किया जाना चाहिए, जो उसके लिए 13,200 रुपये थी और अंतरिम भरण-पोषण को उसी हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए।
मेंटेनेंस का बकाया चुकाने का भी निर्देश दिया
इसके साथ अदालत ने महिला का भरण-पोषण 3,500 रुपये प्रति माह करने का आदेश दिया। अदालत ने रिकाॅर्ड पर लिया कि महिला का पति उत्तर प्रदेश में रह रहा है और वहां कुशल व्यक्ति पर लागू मिनिमम वेज लगभग 13,200 रुपये प्रति माह थी। इसके साथ ही कोर्ट ने पति को तीन महीने के अंदर मेंटेनेंस का बकाया चुकाने का भी निर्देश दिया।
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