यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी ने यूसिल प्रबंधन के खिलाफ किया प्रदर्शशन।
जागरण संसू, जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के नरवा पहाड़ प्रोजेक्ट में सोमवार से कामकाज पूरी तरह ठप हो सकता है। यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ निर्णायक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को विस्थापितों ने नरवा पहाड़ और आसपास के गांवों में विशाल मोटरसाइकिल रैली निकालकर अपनी ताकत दिखाई और सोमवार सुबह से खदान के मुख्य गेट को अनिश्चितकालीन जाम करने की घोषणा कर दी।
पुरानी मांगों और समझौतों पर अड़ा विस्थापित समाज
कमेटी के महासचिव बुधरायकिस्कू ने आरोप लगाया कि यूसिल प्रबंधन वर्ष 2014 और 2023 में हुए समझौतों को लागू करने में टालमटोल कर रहा है। विस्थापितों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पीढ़ी दर पीढ़ी नियोजन: सेवानिवृत्त विस्थापित परिवार के सदस्यों को निरंतरता में नौकरी दी जाए।
- तत्काल स्थायी नियोजन: मृतक विस्थापित परिवारों के आश्रितों को तुरंत कंपनी में स्थायी नौकरी मिले।
- पहली प्राथमिकता: वैसे विस्थापित परिवार जिनके किसी भी सदस्य को अब तक नौकरी नहीं मिली है, उन्हें नियोजन में प्राथमिकता दी जाए।
राजनीतिक समर्थन और अन्य खदानें बंद करने की चेतावनी
बुधराय किस्कू ने कहा कि विस्थापितों ने अपनी जमीनें कंपनी को दे दीं, अब सेवानिवृत्त होने के बाद उनका भविष्य अंधकारमय है। जब तक यूसिल यूरेनियम निकालता है, तब तक विस्थापितों को रोजगार देना प्रबंधन का दायित्व है।
इस आंदोलन को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता बाघराय मार्डी ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने प्रबंधन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रबंधन वार्ता के लिए बुलाकर बिना बातचीत किए प्रतिनिधिमंडल को लौटा देता है, जिससे स्थिति बिगड़ी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नरवा पहाड़ के विस्थापितों को हक नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में यूसिल की सभी सातों खदानों का परिचालन बंद कर दिया जाएगा।
स्कूल और अस्पताल रहेंगे मुक्त
आंदोलन की घोषणा के साथ ही मानवीय दृष्टिकोण का ध्यान रखा गया है। बुधराय किस्कू ने स्पष्ट किया कि माइंस गेट जाम के दौरान स्कूल, अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा। इन्हें बंदी से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। |
|