कुशीनगर के रेलवे स्टेशनों पर लावारिश बैगों में मिल रहीं शीशी-बोतल। सांकेतिक तस्वीर
संवाद सूत्र, कप्तानगंज। सख्ती के बाद भी गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग पर शराब तस्करी हो रही है। तस्कर लगातार इस रेल मार्ग से शराब की खेप पहुंचा रहे हैं। कुशीनगर के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्मों से हो रही बरामदगी इसकी सच्चाई बता रही है। लावारिस बैगों में अंग्रेजी शराब की शीशियां व बोतलें मिल रही हैं।
बिहार में शराबबंदी के बावजूद माफिया सक्रिय हैं और कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ठंड व कोहरा के बीच शराब की खेप बिहार पहुंचाने में जुटे हुए हैं। पिछले एक पखवारा से प्रतिनिदि कप्तानगंज, पिपराइच, सिसवा, खड्डा, पनियहवा समेत अन्य रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों और प्लेटफार्मों से अंग्रेजी शराब की बरामदगी हो रही है।
आरपीएफ और विभिन्न थानों की पुलिस की निगरानी से बचने के लिए बैगों में शराब की शीशियां व बोतले रखकर ट्रेनों के डिब्बों या स्टेशन परिसर में रख देते हैं। मौका देखकर बैग को उठाते हैं और ठिकाने लगा देते हैं। नौ जनवरी को कप्तानगंज, खड्डा व सिसवा बाजार, पांच व छह जनवरी को सिसवा बाजार, एक जनवरी को सिसवा बाजार और पिपराइच स्टेशन पर लावारिस बैगों से आरपीएफ ने शराब बरामद की थी।
इससे पहले 11 दिसंबर को खड्डा, आठ दिसंबर को कप्तानगंज, तीन नवंबर को पनियहवा व कप्तानगंज एवं 25 अक्टूबर को कप्तानगंज और सिसवा बाजार स्टेशन परिसर से अंग्रेजी शराब की खेप पकड़ी गई थी, लेकिन तस्कर पकड़ में नहीं आए।
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इससे साफ है कि तस्कर लगातार रेल मार्ग का सहारा ले रहे हैं। आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक परमेश्वर कुमार ने बताया कि शराब तस्करी के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
ट्रेनों और रेलवे स्टेशन परिसरों की नियमित जांच की जा रही है। शराब माफिया का नेटवर्क अभी पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो पाया है। निगरानी और सख्त की जाएगी, तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी। |