इस साल भी सोने और चांदी में जारी रह सकती है तेजी
आईएएनएस, नई दिल्ली। सोने और चांदी में 2025 (Gold-Silver Price) में देखी गई तेजी इस साल यानी 2025 में भी जारी रहने की उम्मीद है। इसकी वजह सुरक्षित निवेश मांग और इंडस्ट्रियल मांग बने रहना है। यह जानकारी शनिवार को एनालिस्ट की ओर से दी गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के द्वारा जारी किए गए डेटा के मुताबिक, फरवरी एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में इस हफ्ते काफी तेजी आई और यह 1,38,875 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो पिछले हफ्ते की क्लोजिंग भाव 1,35,752 रुपए से अधिक है। वहीं, हाजिर बाजार में 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का दाम इस हफ्ते 1,37,122 रुपए पर पहुंच गया है, जो पिछले हफ्ते के 1,34,782 रुपए से ज्यादा है।
सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट कितना पहुंचा?
एमसीएक्स पर मार्च की एक्सपायरी का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट में भी इस हफ्ते जबरदस्त तेजी देखी गई और यह बढ़कर 2,52,002 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया। इससे यह साफ हो गया कि इसने अपनी हाल की कंसोलिडेशन रेंज से निर्णायक ब्रेकआउट किया है और एक मजबूत बुलिश चैनल में फिर से प्रवेश किया है।
कॉमेक्स पर चांदी वायदा कितनी?
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा, कॉमेक्स पर सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के करीब मजबूत बना हुआ है, इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई और कई हफ्तों की मजबूत रैली के बाद यह रिकॉर्ड ऊंचाई से थोड़ा नीचे स्थिर हो गया।
उन्होंने आगे कहा, इस बीच, कॉमेक्स पर चांदी वायदा की कीमत 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 79.79 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, 75 डॉलर से इसमें उछाल आया क्योंकि औद्योगिक मांग फिर से शुरू हुई और साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए खरीदारी भी बढ़ी।
ग्रीन-एनर्जी की बढ़ती मांग
चांदी में निवेशकों का सेंटिमेंट मजबूत बना हुआ है, जिसे लगातार सप्लाई में कमी, सेंट्रल बैंकों द्वारा रिकॉर्ड खरीदारी और सोलर, ईवी और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ग्रीन-एनर्जी की बढ़ती मांग से सपोर्ट मिल रहा है। सोने और चांदी ने 2025 में निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। इस दौरान सोने में करीब 66 प्रतिशत और चांदी में करीब 171 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है।
कितना पहुंच सकता है रेट?
जानकारों का मानना है कि 2026 के आखिर तक सोने की कीमत $5,000/औंस (लगभग ₹1.50 लाख/10 ग्राम) या उससे अधिक तक जा सकती है। वहीं चांदी $100/औंस (लगभग ₹2.80-₹3.20 लाख/किलो) तक जा सकती है। भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती औद्योगिक मांग और आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों में इजाफा हो सकता है।
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