ठंड और नमी में ज्यादा देर तक रहने वालों को हो रहा चिलब्लेन। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कड़ाके की ठंड में चिलब्लेन के मामले बढ़ने लगे हैं। चिलब्लेन वह रोग है जिसमें हाथ व पैर की अंगुलियों में सूजन आ जाता है। खुजली ज्यादा होने के कारण त्वचा भी छिल जाती है। कई लोगों की अंगुलियां काली पड़ने लगती हैं। समय से उपचार न होने के कारण संक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है। एम्स गोरखपुर में त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 10 से ज्यादा चिलब्लेन पीड़ित रोगी पहुंच रहे हैं।
जो लोग ज्यादा देर तक ठंड और नमी के संपर्क में रहते हैं उनमें चिलब्लेन की आशंका ज्यादा रहती है। यह सूजनयुक्त त्वचा रोग है। ठंड के कारण त्वचा की छोटी रक्त वाहिकाओं में असामान्य प्रतिक्रिया होती है। इस कारण रक्त संचार प्रभावित होता है और त्वचा में सूजन व क्षति होने लगती है।
यह समस्या विशेष रूप से हाथ और पैर की अंगुलियों, एड़ियों, कानों और नाक के सिरे पर देखी जाती है। ज्यादातर लोग लक्षणों को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। ऐसे रोगी जब तक अस्पताल पहुंचते हैं तब तक त्वचा में घाव, अल्सर या नेक्रोसिस (त्वचा का गल जाना) जैसी गंभीर स्थिति हो चुकी होती है। ऐसे मामलों में उपचार कठिन व लंबा हो जाता है। कभी-कभी ऐसे रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
इनको है ज्यादा खतरा
- ठंड के मौसम में खुले में काम करने वाले
- बुजुर्ग और बच्चे
- कम वज़न वाले या एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति
- बार-बार ठंडे पानी के संपर्क में रहने वाले
- वह लोग जो ठंड में पर्याप्त कपड़े नहीं पहनते
समय रहते यह करें
- हाथ-पैर को ठंड से बचाकर रखें, मोज़े, दस्ताने और गर्म कपड़े पहनें
- त्वचा पर दिन में दो से तीन बार अच्छा मायस्चराइजर लगाएं
- गुनगुने पानी का प्रयोग करें, बहुत गर्म पानी से बचें
- अचानक बहुत ठंडे वातावरण में जाने से बचें
- धूमपान से बचें क्योंकि यह रक्त संचार को प्रभावित करता है
- लक्षण दिखते ही त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें
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यह न करें
- आग, हीटर या गर्म पानी से सीधे हाथ-पैर गर्म न करें
- खुजली या घाव को खरोंचें नहीं
- बिना डाक्टर की सलाह क्रीम या दवाओं का उपयोग न करें
लापरवाही से त्वचा हो जा रही शुष्क
ठंड में विंटर जेरोसिस के भी रोगी बढ़ रहे हैं। ऐसे रोगियों की त्वचा अत्यधिक शुष्क हो जाती है। कम नमी, ठंडी हवा, बार-बार गर्म पानी से नहाना और मायस्चराइजर का उपयोग न करना इसके प्रमुख कारण हैं। इससे त्वचा में खुजली, खिंचाव, पपड़ी और दरार पड़ जाती हैं। यह आगे चलकर संक्रमण का कारण बन सकती हैं।
यह हैं लक्षण
- हाथ-पैरों की अंगुलियों में लाल, नीले या बैंगनी रंग के धब्बे
- सूजन, खुजली, जलन या दर्द
- त्वचा का अत्यधिक सूखा और फटना
- छूने पर संवेदनशीलता
- गंभीर मामलों में छाले, घाव या काले पड़ते हिस्से
ठंड में त्वचा की समस्या को हल्के में न लें। प्रारंभिक लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। यदि चिलब्लेन का समय पर उपचार न किया जाए तो नेक्रोसिस, संक्रमण और स्थाई क्षति का कारण बन सकता है। कई रोगियों के देर से आने के कारण उपचार जटिल हो जाता है। -
-डा. सुनील गुप्ता, विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग, एम्स गोरखपुर |