लाहौर में सरबजीत कौर।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। पाकिस्तान के पंजाब (लाहौर) हाईकोर्ट ने सरबजीत कौर उर्फ नूर फातिमा मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कैबिनेट, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री, एफआईए के डीजी, पंजाब पुलिस के आईजी, ईटीपीबी और अन्य अधिकारियों को दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट में यह बताया जाए कि सरबजीत सिख जत्थे से कैसे अलग हुईं, उनका डिपोर्टेशन किस स्थिति में है, उन्हें कानूनी तौर पर किसके हवाले किया गया और जिन पुलिस अधिकारियों की लापरवाही हुई, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, यात्रा वीजा के दुरुपयोग से सिख समुदाय को हुए नुकसान का भी विवरण मांगा गया है।
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सरबीजत कौर की शादी की वीडियो आई थी सामने
सरबजीत कौर, जिन्होंने लाहौर के नासिर हुसैन से शादी कर इस्लाम कबूल किया और नूर फातिमा नाम रखा, फिलहाल लाहौर के दारुल अमान में रखी गई हैं। मेडिकल टीम ने उनकी सेहत को ठीक बताया है, लेकिन पाकिस्तान की इंटीरियर मिनिस्ट्री ने अभी तक उन्हें एक्जिट परमिट देने पर फैसला नहीं लिया है।
सरबजीत के शरण लेने के दावों को वकील ने गलत बताया
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले वकील अली चेंजेजी संधू ने कहा है कि ट्रैवल परमिट मिलते ही सरबजीत को अगले हफ्ते तक भारत भेजा जा सकता है। उन्होंने सरबजीत के शरण लेने के दावों को गलत बताया है।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सरबजीत 4 नवंबर 2025 को गुरु नानक जयंती पर सिख जत्थे के साथ ननकाना साहिब गई थीं। 13 नवंबर को वीजा खत्म होने पर जत्था भारत लौट आया, लेकिन सरबजीत वहीं रुक गईं। 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के पास उन्हें वीजा नियम तोड़ने पर गिरफ्तार किया गया।
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पाकिस्तान में चल रही दो याचिकाएं
5 जनवरी को उन्हें भारत भेजने की कोशिश की गई, लेकिन वाघा बॉर्डर बंद होने और कानूनी अड़चनों के कारण यह संभव नहीं हो सका।पाकिस्तान में इस समय दो याचिकाएं चल रही हैं—एक में पाकिस्तानी नागरिकता और सुरक्षा देने की मांग है, जबकि दूसरी में तुरंत डिपोर्टेशन की अपील की गई है।
जानें सर्बजीत कौर की पाकिस्तान में टाइम लाइन
4 नवंबर 2025 – सर्बजीत कौर यात्री (यात्रा) वीजा पर पाकिस्तान में प्रवेश कर गईं।
13 नवंबर 2025 – उनका वीजा समाप्त हो गया; यत्री दल भारत लौट आया, लेकिन सर्बजीत कौर उनके साथ वापस नहीं आईं।
4 जनवरी 2026 – वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने (ओवरस्टे) के आरोप में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया।
5 जनवरी 2026 – भारत भेजने (डिपोर्टेशन) की कोशिशें सीमा बंद होने और अदालत की रोक के चलते सफल नहीं हो सकीं।
6 जनवरी 2026– उन्हें दारुल अमान भेजा गया; वहीं से मानवीय आधार पर राहत के लिए आवेदन दायर किया गया।
9 जनवरी 2026– दारुल अमान में डॉक्टरों की विशेष मेडिकल टीम ने सर्बजीत कौर का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उनकी सेहत को संतोषजनक बताया।
10 जनवरी 2026 – पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी अधिकारियों से दो हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
10 जनवरी 2026– पाकिस्तान के मंत्री तलाल चौधरी ने मामले की निगरानी की; मेडिकल क्लियरेंस के बावजूद गृह मंत्रालय ने डिपोर्टेशन पर अंतिम निर्णय नहीं लिया।
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