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डीवीवीएनएल आगरा में 31 करोड़ का टेंडर घोटाला: बाबूओं को मिला अधिकारियों का संरक्षण

LHC0088 8 hour(s) ago views 474
  

फाइल।



जागरण संवाददाता, आगरा। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के बाबू कलाकार हैं। कुछ महीनों पर हुए एरियर घोटाले को भी बाबू ने ही अंजाम दिया था। और अब फतेहाबाद क्षेत्र में 81 टेंडरों में हुए 31 करोड़ के घोटाले में भी दो बाबूओं की भूमिका सामने आई है।

इस घोटाले में दो सेवानिवृत्त, एक निलंबित और एक मुख्यालय पर कार्यरत अधीक्षण अभियंता शामिल हैं। इन्होंने मुख्य अभियंता को दरकिनार कर टेंडर जारी कर दिए। इस मामले की भनक प्रबंध निदेशक डीवीवीएनएल नितीश कुमार और मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी को लगी तो जांच के निर्देश दिए।

31 दिसंबर को मिली जांच रिपोर्ट में दो सेवानिवृत्त सहित चारों अधीक्षण अभियंता, दोनों बाबू और फार्मों को दोषी पाया गया है। इसके विरुद्ध थाना फतेहाबाद में अधीक्षण अभियंता फतेहाबाद सोमवीर ने तहरीर दी है।
डीवीवीएनएल के बाबू हैं कलाकार, अधिकारियाें का मिलता है पूरा संरक्षण

वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 बिजनेस प्लान के तहत फतेहाबाद क्षेत्र में हुए 81 टेंडरों में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। टेंडर बाबू नीरज और लेखाकार सतीश कुमार ने सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता वीके सिंह, अरविंद कुमार और पुराने मामले में निलंबित चल रहे दूधनाथ प्रसाद और मुख्यालय पर बतौर अधीक्षण अभियंता, स्टोर रविकांत मिश्रा से सांठगांठ कर नियम विरुद्ध पहले 12 करोड के आठ टेंडर, 93 लाख के चार, 16.30 करोड़ के 40 टेंडर इनके अलावा 29 टेंडर तीन साल के अंदर नियम विरुद्ध मैसर्स रघुवीर कांट्रेक्टर, मैसर्स न्यूटेक इलेक्ट्रिक्लस, मां दुर्गा कंस्ट्रक्शन, मैसर्स आरएस एंटरप्राइजेज, मै. शिवा इंटरप्राइजेज, मै. कृष्णा इलेक्ट्रीकल्स एंड कांट्रेक्टर्स, श्रीमहाकाल इंटरप्राइजेज, मै. सीडीआरएम पावर प्रा. लि. मैसर्स चौहान इंटरप्राइजेज, मै. रिषी इंटरप्राइजेज को दे दिए गए।
आरोपित चार अधीक्षण अभियंता, दो बाबू, और फर्मों के विरुद्ध दी तहरीर

नियम विरुद्ध दिए गए टेंडरों की लगातार शिकायतें होती रहीं, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। मामला प्रबंध निदेशक नितीश कुमार और मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी तक पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षण अभियंता राजकुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यी जांच कमेटी गठित कर 12 नवंबर को जांच किए जाने के आदेश दिए। 31 दिसंबर को जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें चारों अधीक्षण अभियंता और दोनों बाबुओं को दोषी पाया गया। दोषी पाए जाने पर प्रबंध निदेशक नितीश कुमार ने कार्यरत अधिकारी और बाबुओं को निलंबित करते हुए सेवानिवृत्त दोनों अधीक्षण अभियंताओं के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए।
12 लाख बढ़ा दी थी कीमत


वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में हुए टेंडरों में आंतरिक जांच में गड़बड़ी सामने आई है। कुछ टेंडर में प्रथम निविदादाता ने निविदा की धनराशि 15 लाख रुपये अंकित की थी तो लिपिक द्वारा उसमें परिवर्तन कर 12 लाख रुपये की वृद्धि कर दी गई। कुछ ऐसी भी निविदा हुई जिसमें टेंडर डाले ही नहीं गए, इसके बाद भी उन्हें अनुबंध कर दिया।

समीक्षा में पता चला कि फतेहाबाद स्थित कार्यालय में टेंडर तो दिख रहे थे, लेकिन उनकी फाइलें मुख्य कार्यालय में अनुमोदन के लिए नहीं आईं। जांच में सामने आया है कि ठेकेदारों के साथ मिलकर टेंडर नीरज ने फर्जीवाड़ा किया है।
अधिकारों का किया दुरुपयोग

दो वर्ष पूर्व अधीक्षण अभियंताओं को टेंडर का असीमित अधिकार दे दिया गया था। फतेहाबाद क्षेत्र में असीमित वित्तीय अधिकारों का अपने चहेती फर्मो को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर दिए। अवैध एवं कूटनीति प्रयोग कर विभाग को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाई गई।


शिकायत के आधार पर नवंबर में जांच के लिए टीम का गठन किया गया था। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं पाईं गई हैं। जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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कपिल सिंधवानी, मुख्य अभियंता, डीवीवीएनएल
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