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मां की हत्या कर बेटी के अपहरण के आरोपी को खोजने में पुलिस की दस टीमें फेल।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मां की हत्या कर बेटी का अपहरण करने वाले पारस सोम और सुनील सोम को पकड़ने में पुलिस के पसीने छूट गए। दस टीमें 58 घंटे तक भी मुख्य आरोपित का सुराग नहीं लगा पाई। बल्कि शीर्ष अफसरों को सर्विलांस और तीन एसओजी की टीम गुमराह करती रही। संयोग रहा कि पारस सोम ने ट्रेन के अंदर से सहयात्री का मोबाइल लेकर गांव के झोलाछाप राजेंद्र कुमार को कॉल कर दी।
अगर पारस सोम मोबाइल से कॉल नहीं करता। तब पुलिस उसे पकड़ ही नहीं पाती। साफ है कि पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह से खत्म हो चुका है। एलआईयू और इंटेलीजेंस की टीम भी सिर्फ राजनीति पार्टी के लोगों के आगमन को लेकर ही जानकारी जुटाती रही।
गुरुवार को सुनीता की हत्या और बेटी रूबी के अपहरण की घटना को देखते हुए पुलिस ने गंभीरता दिखाई थी। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने तत्काल से फरार आरोपितों को बरामद करने के लिए दस टीमों को गठन किया था।
शुक्रवार को परिवार के लोगों ने बेटी की बरामदगी होने तक मां के शव का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। अनेक राजनीति पार्टी के लोगों को समझाकर ही पुलिस शव का अंतिम संस्कार कर पाई, जबकि पुलिस की दस टीमें हत्यारोपित पारस सोम का पता तक नहीं लगा पाई, जबकि सर्विलांस, साइबर सेल, एसपी सिटी और एसपी देहात की एसओजी टीम और एसएसपी की एसओजी टीम को भी इस घटना में लगाया गया था।
साथ ही सरधना थाने में पूर्व में तैनात रहे इंस्पेक्टरों की फौज भी खड़ी कर दी गई थी। सभी टीमें शीर्ष अफसरों को अंत तक गुमराह करती रही कि लीड मिल गई है, जल्द ही सफलता मिल जाएगी। शनिवार को शीर्ष अफसर खुद ही मैदान में उतरे।
एसएसपी, डीआईजी और एडीजी ने मामले को संभाला। पारस ने जैसे ही गांव के छोलाछाप को काल की। तभी शीर्ष अफसरों ने हरिद्वार पुलिस की मदद से रूबी को सकुशल बरामद किया और आरोपित पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया।
साथ ही पुलिस के वाट्सएप ग्रुप में शाम सात बजे मैसेज भी अफसरों ने डाल दिया। सभी टीमाें को बताया गया कि आरोपित गिरफ्तार हो चुका है। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पारस और रूबी मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रहे थे। सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र से दोनों की तलाश की जा रही थी। |
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