search

24 घंटे रहेगी ड्यूटी,खिचड़ी मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किया गया ये बंदोबस्त

deltin33 2026-1-10 19:57:14 views 268
  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मकर संक्रांति के अवसर लगने वाले खिचड़ी मेले को लेकर गोरखनाथ मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। खिचड़ी चढ़ाने में श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए डेढ़ हजार स्वयंसेवकों को व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए जिम्मेदारी सौंप दी गई है। स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी मंदिर से लेकर मेला परिसर तक जिम्मेदारी तय की गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी स्वयंसेवक मकर संक्रांति से एक दिन पहले से लेकर एक दिन बाद तक मोर्चा संभालेंगे। यह स्वयंसेवक प्रशासन के समानांतर एक मजबूत मानव प्रबंधन तंत्र के रूप में कार्य करेंगे।

मंदिर प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य द्वार से सिंह द्वार तक महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षण संस्थानों के एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवक मोर्चा संभालेंगे, जबकि सिंह द्वार से गर्भगृह तक की व्यवस्था गुरु गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के छात्रों के जिम्मे होगी। प्रवेश और निकास द्वारों पर भी स्वयंसेवकों की ड्यूटी रहेगी।

श्रद्धालुओं की कतार लगवाने की जिम्मेदारी भी स्वयंसेवकों की ही होगी। मंदिर में चलने आयोजित होने वाले भंडारे की व्यवस्था के लिए 100 से अधिक स्वयंसेवकों की टीम बनाई गई है। इनमेंं से कुछ प्रसाद का भंडारे तक पहुंचना सुनिश्चित करेंगे और बाकी वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाएंगे। खिचड़ी चढ़ने के बाद उसे सकुशल सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संस्कृत विद्यापीठ के छात्र और शिक्षक निभाएंगे।

मेला परिसर में कुछ स्वयंसेवक मंदिर द्वारा निर्धारित सफेद वस्त्र में नहीं रहेंगे। सामान्य वस्त्र में रहकर वह व्यवस्था पर पैनी नजर रखेंगे। कहीं भी कोई गड़बड़ी पाए जाने या फिर संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने पर इसकी सूचना मंदिर प्रबंधन को देंगे। ऐसे स्वयंसेवक देखने में तो श्रद्धालु जैसे लगेंगे लेकिन वास्तव में वह मंदिर की गुप्त मानव प्रबंधन टीम का हिस्सा होंगे। स्वयंसेवक दो से तीन शिफ्ट में 24 घंटे सेवा देंगे।

आठ व छह घंटे की होगी शिफ्ट
मंदिर में खिचड़ी मेले के लिए मानव प्रबंधन की व्यवस्था संचालित कर रहे डा. प्रदीप कुमार राव ने बताया कि स्वयंसेवकों की ड्यूटी 24 घंटे और 12 घंटे के मानक पर निर्धारित की गई है। 24 घंटे की ड्यूटी को आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्टों में बांटा गया है, जबकि 12 घंटे की ड्यूटी छह-छह घंटे की दो शिफ्टों में होगी। संस्कृत विद्यापीठ के शिक्षक, छात्र और मंदिर के कर्मचारी 24 घंटे के मानक पर सेवा देंगे, जबकि एनसीसी और एनएसएस स्वयंसेवक 12 घंटे की ड्यूटी निभाएंगे। सभी को पहचान पत्र दिया जाएगा, जिसका उपयोग वह केवल मंदिर परिसर में करेंगे।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
476824